समाजवादी पार्टी से निष्काषित प्रोफेसर राम गोपाल यादव ने सोमवार को खुलकर सपा नेतृत्व को चुनौती दी। हालांकि इस दौरान एक वक्त ऐसा भी आया जब वह फूट-फूट कर रो पड़े। उन्होंने बोला मेरे साथ अन्याय हुआ है। अगर नेता जी को लगता है तो उसे ठीक करें, नहीं तो कोई बात नहीं। उन्होंने बोला की वह कभी पद के लालच में नहीं पड़े।
कहा, पार्टी में मनमानी चल रही है। मैंने सपा का संविधान लिखा और मुझे ही पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। पार्टी में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को नजरअंदाज कर टिकटों के बंटवारे की खिलाफत करते हुए बोले, चूंकी प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की कमान अखिलेश के हाथों में होगी इसलिए टिकट वितरण में भी उनकी सहमती अनिवार्य है। ऐसा न होने पर पार्टी को नुकसान झेलना पड़ेगा। सपा में जारी अंदरुनी कलह पर बोले, अखिलेश पूरे देश में एक मजबूत नेता के तौर पर उभरकर सामने आए हैं।
साथ ही कहा सभी निष्काषित नेताओं की पार्टी में वापसी होनी चाहिए। अमर सिंह और शिवपाल यादव का नाम लिए बिना उन्होंने कहा, कुछ लोग टिकट वितरण में मनमानी कर रहे हैं। ऐसे में समाजवादी पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह को तय कर घोषणा करनी होगी कि चुनाव अखिलेश के नेतृत्व में ही लड़ा जाए।
रामगोपाल यादव ने ऐसा न होने की स्थिति में पार्टी का विशेष अधिवेशन बुलाने की बात कही है। वहीं राज्य सभा में अगला सपा का नेता चुने जाने पर बोले, 'उसका निर्णय मुलायम सिंह लेंगे। मेरी जगह राज्यसभा में नेता कोई भी आए, वह रामगोपाल जैसा नहीं हो सकता।'
रामगोपाल यादव ने कहा वे न तो वे अब मुलायम को कोई चिट्ठी लिखेंगे और न ही उनसे मिलने जाएंगे। मुलायम को बेमिसाल नेता बताया लेकिन साथ ही यह भी कहा कि उनके नजदीक राय देने वाले लोग ठीक नहीं होते तो वे गलत फैसले ले लेते हैं। लेकिन जब वे अपनी मर्जी से फैसले लेते हैं तो सही साबित होते हैं।
500 व हजार के नोटों पर प्रतिबंध लगाए जाने पर उन्होंने कहा जब भाजपा के नेता वोट मांगने जाएंगे तो उनकी पीठ पर बेलन पड़ेंगे। आज महिलाएं बैंकों में सबसे ज्यादा परेशानी झेल रही हैं। हालांकि रामगोपाल यादव ने पीएम मोदी को व्यक्तिगत स्तर पर ईमानदार बताया।
इटावा जिला पंचायत के अध्यक्ष आवास पर हुई इस प्रेस वार्ता में उनके साथ सांसद तेज प्रताप, जिला पंचायत अध्यक्ष अंशुल यादव, एमएलसी राकेश यादव, निलंबित एमएलसी अरविंद यादव, राजीव यादव विधायक मेनपुरी व मुलायम के भाई राजपाल यादव मौजूद थे।