भारतीय रिजर्व बैंक का भरपूर करेंसी होने का दावा रविवार को खोखला साबित हुआ। बैंक वाले 10-10 हजार रुपये के लिए परेशान दिखे। चलन वाली करेंसी खत्म होने पर 70 फीसदी बैंकों ने चार बजे से पहले ही शटर गिरा दिए। नोट बदलने का काम तो पूरी तरह ठप रहा। जिन बैंकों में पहले दिन करेंसी बदलने का काउंटर खुला था, रविवार को उसे भी बंद कर दिया गया।
बैंकों के प्रबंधकों ने दबी जुबान स्वीकारा कि रिजर्व बैंक जरूरत के मुताबिक करेंसी सप्लाई नहीं कर पा रहा है। मांग के अनुपात में करीब 50 फीसदी करेंसी की कमी है। यह हालात यूपी के सभी बैंकों में हैं। रिजर्व बैंक के कानपुर रीजनल ऑफिस से ही उत्तराखंड को भी करेंसी सप्लाई होती है। सूत्र बताते हैं कि उत्तराखंड के कई जिलों में तो नई करेंसी पहुंची तक नहीं है। सामान्य दिनों की अपेक्षा सौ के नोटों की मांग 10 गुना बढ़ी है।
बैंक इसे पूरा नहीं कर पा रहे हैं। इस वजह से नोट बदलने का काम रोक दिया गया है। उन्हें तरजीह दी जा रही है जो अपने खाते में रुपये जमा कराने आ रहे हैं और खर्च के लिए खाते से ही रुपये निकाल रहे हैं। शहर की अधिकतर बैंकों में करेंसी खत्म होने पर कहीं पांच हजार रुपये निकालने की छूट दी गई तो कहीं दो हजार रुपये। जब इससे भी बात नहीं बनी तो सर्वर ठप होने की बात कह काम बंद कर दिया गया। इससे जगह जगह हंगामे होते रहे।
बैंकों ने ग्राहकों को भेजे मैसेज
पीएनबी, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक, ओरिएंटल बैंकों ने अधिक लोड के चलते अपने उपभोक्ताओं को मैसेज भेजकर भीड़ न बढ़ाने का आग्रह किया है। एचडीएफसी बैंक ने कहा है कि 30 दिसंबर तक रुपये बदलने और जमा करने का काम चलेगा। अभी आने से बचें।
इशारों में रिजर्व बैंक ने भी समझाया
शनिवार को आधिकारिक बयान जारी कर रिजर्व बैंक ने ग्राहकों से अपील की थी कि हालात सामान्य होने तक बैंकों में भीड़ न बढ़ाएं। इससे सर्वर ठप हो सकता है। करेंसी की कमी तो नहीं लेकिन डिजिटल साधनों का इस्तेमाल करें।
भारतीय स्टेट बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया सौ के नोटों की किल्लत बढ़ गई है। इसे नियंत्रित करने के लिए रुपये बदलने का काम रोका गया है। ऐसे हालात एसबीआई की सभी शाखाओं में है। 500 का नोट आने से पहले स्थिति ठीक नहीं होगी। रिजर्व बैंक प्रयास कर रहा है लेकिन यह किसी एक शहर, प्रदेश भर का मामला नहीं है। देश भर में रुपयों की सप्लाई सुचारु करना बड़ा काम है।