निमोनिया से दो रोगियों की मौत हुई थी। ये सीओपीडी के रोगी थे। चेस्ट हॉस्पिटल में ओपीडी स्तर पर इनका इलाज चल रहा था। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के सीनियर फिजीशियन डॉ. बीपी प्रियदर्शी ने बताया कि जाड़े में धमनियों और नसों में सिकुड़न आने से खून का थक्का जम जाता है।