कानपुर के शिवराजपुर इलाके में प्राचीन खेरेश्वर तट पर बीच धारा में गंगा स्नान कर रही मां को डूबता देख तीन बच्चों ने पानी में छलांग लगा दी। शोर-शराबा सुनकर गोताखोर उन्हें बचाने को नदी में कूद गए। जाल डालकर महिला को तो बचा लिया गया लेकिन उसके तीनों बच्चों की मौत हो गई।
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घटना के बाद बेसुध हुई पीड़ित मां गीता पाल
शिवराजपुर विकास खंड क्षेत्र के रामपुर नरुआ गांव निवासी सर्वेश पाल की पत्नी गीता पाल बुधवार सुबह पूर्णिमा पर्व पर बेटी राखी (13), उमा (10) और बेटा सूरज (10) संग खेरेश्वर स्थित प्राचीन गंगा तट पर स्नान के लिए आई थी। शिवराजपुर एसओ जसवंत सिंह ने बताया कि वे सुबह करीब 11 बजे खेरेश्वर गंगा तट के पक्का घाट पहुंचे। गीता ने नदी का तेज बहाव देख पहले अपने तीनों बच्चों को स्नान कराया। इसके बाद स्वयं नदी में स्नान करने उतरी।
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तीनों बच्चों की तलाश करने के लिए तट पर मौजूद गोताखोर
गीता ने जैसी नदी में डुबकी लगाई तो वह तेज बहाव में संतुलन खो बैठी और गहरे पानी में चली गई। मां को डूबता देख तीनों बच्चों ने बिना सोचे-समझे ही नदी में छलांग लगा दी। चारों को गोता खाता देख स्नान को आए लोगों ने पक्के घाट की ओर दौड़ लगाई। घाट के गोताखोर लालू, रजोल, भगवानदीन और शिवकुमार चारों को बचाने को नदी में कूद गए।
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घटना के बाद बेसुध हुई पीड़ित मां गीता पाल
गोताखोरों ने गीता को तो सकुशल बाहर निकाल लिया, लेकिन तीनों बच्चे गंगा के बहाव में लापता हो गए। मौके पर पहुंची पुलिस ने सभी नाविकों को बुलाकर नदी में जाल डलवाया। करीब 40 मिनट की मशक्कत के बाद पहले उमा को बेसुध हालत और सूरज को गंभीर हालत में बाहर निकाला। आनन-फानन में दोनों को सीएचसी भेजा गया, जहां डाक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया।
वहीं देर शाम तक नदी के तेज बहाव में राखी का कोई सुराग नहीं लग सका। एकाएक दो बच्चों की मौत और एक बच्चे के लापता हो जाने से गीता और सर्वेश रो रोकर बेसुध हो गए। घटना की सूचना के बाद बड़ी संख्या में पीड़ित परिवार के लोग खेरेश्वर घाट पर पहुंचे।