हालात और खराब होते देख बृजेश जच्चा-बच्चा को वापस जिला अस्पताल ले आए इधर, अशोक निषाद के वायरल हुए मैसेज पर जिले के तीन लोग ओ पॉजिटिव खून देने को निकल पड़े थे। अस्पताल से 18 किलोमीटर दूर पत्योरा से चले अनुज पांडेय सबसे पहले पहुंचे उन्होंने खून देना शुरू किया।
तबतक शहर के बंगाली मोहाल निवासी लल्ला तिवारी भी पहुंच गए। उन्होंने भी रक्तदान किया। तभी 15 किलोमीटर दूर से पहुंचे भरुआसुमेरपुर के इमरान अंसारी ने भी महादान कर जच्चा-बच्चा की जान बचा ली। अब दोनों स्वस्थ हैं।
महिला के शरीर में खून की काफी कमी थी। अस्पताल में ओ पॉजिटिव खून नहीं होने से जच्चा और बच्चा दोनों की जान का खतरा था। ऐसे में उन्हें कानपुर रेफर किया गया था। रास्ते में प्रसव हो गया। सही वक्त पर डोनेटर मिल गए इसलिए दोनों की जान बच गई। - पूनम सचान, चिकित्सक, जिला अस्पताल, हमीरपुर
लॉकडाउन के कारण व्यक्ति या संस्था के माध्यम से रक्तदान नहीं किया जा रहा है। ऐसे में ब्लड बैंक में खून की कमी है। ओ पॉजिटिव खून भी नहीं था। तीन डोनरों ने जो खून दिया उसी को ही प्रसूता को चढ़ाया गया है। - हरेंद्र सिंह यादव, ब्लड बैंक प्रभारी