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Kanpur News: जघन्य अपराध में दोषियों को होनी चाहिए थी फांसी

Sun, 17 Dec 2023 01:14 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
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कानपुर देहात। घाटमपुर क्षेत्र में हुए मासूम की हत्या मामले में अदालत का फैसला आने से पहले ही कचहरी के अधिवक्ताओं में दोषियों की सजा पर चर्चा चल रही थी। जैसे ही मामले में अदालत ने दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई तो जहां कुछ अधिवक्ताओं ने अदालत के फैसले का स्वागत किया तो कुछ अधिवक्ताओं ने मामले में दोषियों को फांसी की सजा न होने पर अफसोस जताया। उनका कहना था कि जघन्य अपराध के दोषियों को सिर्फ फांसी की सजा होनी चाहिए। जिससे कभी भी ऐसे अपराधों की पुनरावृत्ति न हो।
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जघन्य अपराध में सिर्फ मृत्युदंड देना चाहिए

कचहरी के वरिष्ठ अधिवक्ता जीतेंद्र प्रताप सिंह चौहान ने कहा कि औलाद पाने के लिए किसी दूसरे की औलाद को नृशंस तरीके से मार कर उसके अंगों को निकालकर खाना मानव सभ्यता के विपरीत है। ऐसे लोग मानव के रूप में पिशाच हैं ऐसे अपराध में दोषियों को सिर्फ मृत्युदंड दिया जाना चाहिए। हालांकि अदालत ने दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है इससे पीड़ित परिवार को न्याय मिला है।

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मामले में पहले आना चाहिए था फैसला

अधिवक्ता सरोज दीक्षित ने कहा कि मासूमों के साथ घटित मामलों में अदालत को दिन प्रतिदिन सुनवाई करते हुए जल्द अपना फैसला देना चाहिए। इस मामले में तीन साल बाद फैसला आया है। पीड़ित परिवार को न्याय के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा है। मासूम के साथ हुई घटना के दोषियों को सिर्फ फांसी होनी चाहिए थी।
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मृत्युदंड देने से समाज में जाता संदेश
अधिवक्ता पवनेश कुमार शुक्ला ने कहा कि अदालत अगर मामले में दोषियों को उम्रकैद के स्थान पर मृत्यु दंड की सजा सुनाती तो समाज में ऐसे अपराध करने वालों को एक संदेश जाता। साथ ही ऐसे अपराध करने का कोई दुस्साहस नहीं करता।



नृशंस तरीके से हुई मासूम की हत्या
अधिवक्ता महेश यादव ने कहा कि अदालत से दोषियों को उम्रकैद की सजा से पीड़ित परिवार को संतुष्टि मिली होगी, लेकिन अगर अदालत दोषियों को फांसी की सजा सुना देती तो उन्हें खुशी होती साथ ही ऐसे अपराधियों के लिए सबक मिलता।
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