संक्रमण काल में शहर की हवा दुरुस्त रहे, इसके लिए पर्यावरण का स्वच्छ रहना जरूरी है। पराली पर पूरी तरह से प्रतिबंध नहीं लग पाया है और दिवाली के पटाखों से फिर से प्रदूषण का स्तर बढ़ने की आशंका बढ़ गई है।
हालांकि संक्रमण काल में स्वच्छ हवा हर किसी के लिए जरूरी है, इसके लिए शहर के युवा मन बना चुके हैं। इन्हें अपनी क्षणिक खुशी से कहीं ज्यादा प्यारा पर्यावरण है। पर्यावरण की बेहतरी के लिए आमजनों की राय व्यक्त करती रिपोर्ट -
बेशक, इस बार की दीपावली पिछली बार की तरह अभी तक समझ में नहीं आ रही है लेकिन पटाखा बाजार के जानकार दो दिन के इस त्योहार में करीब पौने दो करोड़ के पटाखे जलाए जाने का अनुमान लगा रहे हैं।
इससे देखा जाए तो दीपावली में होने वाली आतिशबाजी से पर्यावरण पर गहरा प्रभाव पड़ना तय है। चूंकि जिले में पर्यावरण पर निगरानी के लिए कोई संस्था अथवा विभाग कार्यरत नहीं है, ऐसे में यहां की खराब होने वाली हवा की जानकारी नहीं लग पाती है।