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कभी गल्ले की आढ़त में काम करते थे ये विधायक 

Sun, 17 Sep 2017 02:46 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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पूर्व विधायक जौहरी लाल त्रिवेदी (फाइल फोटो)
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कभी आढ़त में काम करने वाले इस नेता को लोग कभी भूल नहीं सकते। कभी गल्ले की आढ़त में काम करने वाले इस नेता ने अपनी ईमानदारी और मेहनत के चलते न केवल राजनीतिक जीवन में ही नहीं बल्कि सामाज में अपनी अमिट छाप छोड़ी है। जानते हैं इनके व्यक्तित्व के अनसुने पहलू...
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कानपुर सरसौल विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीन बार विधायक रहे जौहरी लाल त्रिवेदी का शनिवार सुबह कोपरगंज स्थित निवास पर निधन हो गया। वे 93 वर्ष के थे। उनकी पहचान मेहनतकश व्यापारी, फिर ईमानदार व किसानों-मजदूरों के लिए संघर्षशील रहने वाले नेताओं में होती थी।

महज 15 साल की उम्र में रोजी रोटी की तलाश में वे कानपुर आए तो कोपरगंज में गल्ले की आढ़त पर नौकरी करनी पड़ी। कुछ ही समय में उन्होंने अपनी आढ़त खोलकर व्यापारियों को चकित कर दिया था। फिर एक के बाद एक नए कारोबार स्थापित किए। प्रधान से लेकर विधायक तक बने। जौहरी लाल त्रिवेदी का जन्म बिधनू के जामू गांव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था।
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वह 1960 से लेकर 1971 तक जामू के ग्राम प्रधान रहे। 1973 में बिधनू के ब्लाक प्रमुख बने। सरसौल विधान सभा क्षेत्र से 1977 में जनता पार्टी से पहली बार विधायक चुने गए। 1984 में दलित मजदूर किसान पार्टी से दोबारा और 1989 में जनता दल से तीसरी बार विधायक बने। क्षेत्र में इनकी छवि जमीनी नेता के रूप में रही जिसको लोग आज भी याद करते हैं।

 
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पूर्व विधायक जौहरी लाल त्रिवेदी (फाइल फोटो)
व्यापारी नेता अवधेश बाजपेई बताते हैं कि कोपरगंज में भूसे की आढ़त से व्यापार की शुरुआत की थी जो बाद में गल्ले की आढ़त तक पहुंच गई। शहर के कई नेताओं के वे राजनीतिक गुरु भी रहे। जौहरी लाल के पुराने नजदीकियों में पाल्हेपुर के पूर्व प्रधान हृदय नारायण दीक्षित (76) ने बताया कि एक बार इन्होंने ईमानदारी की मिसाल पेश की थी जिसके प्रत्यक्षदर्शी वो खुद थे। लखनऊ स्थित विधायक निवास में शहर का एक बड़ा व्यापारी किसी काम को कराने के लिए एक ब्रीफकेस भरकर रुपये लेकर देने आया था।त्रिवेदी जी ने जैसे ही रुपये देखे तो उसको कड़ी फटकार लगा भगा दिया। बाद में वही व्यापारी आगे चलकर कानपुर का मेयर भी बना।

नागापुर के पूर्व प्रधान करुणा शंकर त्रिपाठी (63) ने बताया कि किसानों की शिकायतों पर जब अधिकारी बरगलाने लगते थे तो वे अपनी जीप में खुद किसानों को बैठाकर अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंच जाते थे।

नर्वल के पूर्व प्रधान रामरतन सिंह यादव (70)बताते हैं कि जौहरी लाल त्रिवेदी जैसा जमीनी नेता आज तक नहीं देखा। परिवार में पत्नी रमा देवी बेटे रमेश चंद्र, ईश्वर चंद्र, प्रकाश चंद्र व दो बेटियां ऊषा व लक्ष्मी हैं। अंतिम संस्कार में उमड़े शहरी जौहरी लाल त्रिवेदी का शनिवार दोपहर भगवतदास घाट पर अंतिम संस्कार किया गया।
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