पूर्व विधायक जौहरी लाल त्रिवेदी (फाइल फोटो)
कभी आढ़त में काम करने वाले इस नेता को लोग कभी भूल नहीं सकते। कभी गल्ले की आढ़त में काम करने वाले इस नेता ने अपनी ईमानदारी और मेहनत के चलते न केवल राजनीतिक जीवन में ही नहीं बल्कि सामाज में अपनी अमिट छाप छोड़ी है। जानते हैं इनके व्यक्तित्व के अनसुने पहलू...
कानपुर सरसौल विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीन बार विधायक रहे जौहरी लाल त्रिवेदी का शनिवार सुबह कोपरगंज स्थित निवास पर निधन हो गया। वे 93 वर्ष के थे। उनकी पहचान मेहनतकश व्यापारी, फिर ईमानदार व किसानों-मजदूरों के लिए संघर्षशील रहने वाले नेताओं में होती थी।
महज 15 साल की उम्र में रोजी रोटी की तलाश में वे कानपुर आए तो कोपरगंज में गल्ले की आढ़त पर नौकरी करनी पड़ी। कुछ ही समय में उन्होंने अपनी आढ़त खोलकर व्यापारियों को चकित कर दिया था। फिर एक के बाद एक नए कारोबार स्थापित किए। प्रधान से लेकर विधायक तक बने। जौहरी लाल त्रिवेदी का जन्म बिधनू के जामू गांव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था।
वह 1960 से लेकर 1971 तक जामू के ग्राम प्रधान रहे। 1973 में बिधनू के ब्लाक प्रमुख बने। सरसौल विधान सभा क्षेत्र से 1977 में जनता पार्टी से पहली बार विधायक चुने गए। 1984 में दलित मजदूर किसान पार्टी से दोबारा और 1989 में जनता दल से तीसरी बार विधायक बने। क्षेत्र में इनकी छवि जमीनी नेता के रूप में रही जिसको लोग आज भी याद करते हैं।