इसके बाद से अक्षय का परिवार चिंतित हो गया। तभी बेटे की जान बचाने के लिए उनकी मां रमाकांती आगे आई। फिर लखनऊ के हॉस्पिटल में जरूरी चिकित्सीय परीक्षण के बाद डॉक्टरों ने रमाकांती की एक किडनी निकाल कर बेटे अक्षय के शरीर में सफलता पूर्वक ट्रांसप्लांट कर दिया।
हर मां अपने बच्चों की सलामती चाहती है
मां रमाकांती बताती हैं कि बेटे के लिए अंग दान करने में कौन सी बड़ी बात है। हर मां अपने बच्चों की सलामती चाहती है। बताया किडनी ट्रांसप्लांट करवाने के चार माह बाद हम दोनों स्वस्थ हैं। बेटे अक्षय सिंह भावुक मुद्रा में कहते हैं कि जब मेरी दोनों किडनी खराब हो गईं।
बेटा बोला- मेरी मां ही मेरे लिए भगवान है
तब मां ने अपनी एक किडनी देकर मेरी जान बचा ली। मां ने मेरे लिए जो किया, उसका कर्ज मैं अगले जन्म में भी नहीं उतार सकता। कहते हैं मेरी मां ही मेरे लिए भगवान है। तीन भाइयों में सबसे बड़े अक्षय की शादी छह वर्ष पूर्व हुई थी। अब चार वर्ष की एक बेटी भी है।