कानपुर। उर्सला अस्पताल में हड्डी रोग सर्जन की ओर से पैसे लेने के मामले में चल रही जांच में रोगी ने पहचानने से इन्कार कर दिया। ऐसा डेढ़ साल में तीसरी बार हुआ है जब रोगी ने डॉक्टर की शिकायत करने के साथ ही सीसीटीवी फुटेज से पहचाना और अंत में शिकायत वापस ले ली है। तीनों ही मामलों में शिकायतकर्ता ने कहा कि गलती हो गई। इससे आशंका जताई जा रही है कि अस्पताल में इलाज के नाम पर वसूली करने वालों का पूरा सिंडिकेट काम कर रहा है। यही सिंडिकेट शिकायतकर्ता पर दबाव बनाकर आरोपों को खारिज करा देता है।
ताजा मामला ग्वालटोली निवासी सुकृति का है। करीब एक महीना पहले टूटे कंधे की हड्डी की सर्जरी कराने उर्सला गई थीं। यहां उनसे पैसे की मांग की गई। सुकृति ने इसकी शिकायत पहले सीएमओ और फिर जिलाधिकारी से की। महिला ने कहा कि डॉक्टर के असिस्टेंट ने पैसे मांगे थे। मामले में डीएम ने जांच के निर्देश दिए तो निदेशक डॉ. एचडी अग्रवाल ने सीएमएस डॉ. बीसी पाल की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी बना दी। कमेटी ने जांच कर रिपोर्ट तैयार कर ली है लेकिन अभी डीएम के यहां भेजी नहीं गई। उससे पहले ही शिकायत करने वाली महिला ने यह कहकर लिखित शिकायत वापस ले ली कि उससे पैसे लेने वाले शख्स को पहचानने में गलती हो गई है। इसके साथ ही अब अस्पताल में उसका इलाज भी निशुल्क किया जा रहा है। शिकायतकर्ता सुकृति ने बताया कि डॉक्टरों ने कहा है कि अब वह ही उसका ऑपरेशन करेंगे और इसमें पड़ने वाली रॉड भी खुद ही खरीद कर लगाएंगे।
इससे पहले भी हड्डी रोग सर्जन पर कई रोगियों ने संवाद न्यूज एजेंसी की पड़ताल में शिकायत की थी। उस समय शासन के निर्देश पर जांच कमेटी अस्पताल में ही बनाई गई थी और अंत में रोगी मुकर गए। टीम ने डॉक्टर को क्लीन चिट दे दी थी। वहीं, 2024 में बाबूपुरवा की एक महिला ने जनरल सर्जन पर पैसे मांगने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा थी कि डॉक्टर के ड्राइवर ने पैसे मांगे। हालांकि बाद में वह भी बिना सर्जरी कराए ही चली गईं और अपनी शिकायत वापस ले ली।