मतदान से ठीक एक दिन पहले प्रत्याशी अपनी जीत के लिए ब्रह्मास्त्र का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन शायद ये कम ही लोग जानते हैं कि सालों से चले आ रहे इस ‘चुनावी ब्रह्मास्त्रों’ का मतलब क्या है। चुनावी ब्रह्मास्त्र का इस्तेमाल प्रत्याशी मतदाताओं को रिझाने के लिए करते हैं। ये हैं वो ब्रह्मास्त्र...
बिरादरी की नाक बचाने की दुहाई
वोटिंग के एक दिन पहले कोई बिरादरी की नाक बचाने की दुहाई देता रहा तो कोई सरकार बनने पर गांव-गली और घर तक सुविधाएं पहुंचाने का भरोसा दिलाता रहा। प्रत्याशियों को चुनाव में बेरोजगार भी याद आए। उनके रोजगार की भी बात कही गई।
प्रधानों और कोटेदारों को पटाना
समर्थक शनिवार की रातभर ग्राम प्रधानों और कोटेदारों से संपर्क साधे रहे। प्रत्याशियों ने जीत के लिए प्रधानों और कोटेदारों को ही ब्रह्मास्त्र के तौर पर प्रयोग किया है।
मतदाताओं को गिफ्ट
मुस्लिम प्रधानों को समेत सभी जातियों को अपने-अपने क्षेत्र में बिरादरी को समेटने का संदेश दिया है। चुनाव आयोग की सख्ती के चलते कैश और गिफ्टों पर लगाम लगी रही।
शराब की बोतलें और लिफाफे
कुछ जगहों पर चोरी छिपे मतदाताओं को रिझाने के लिए शराब की बोतलें और लिफाफे में बंद रुपयों को देने का काम ब्रह्मास्त्र के तौर पर किया जाता है। हालांकि चुनाव आयोग की इसपर पैनी नजर है। फिलहाल रात भर भाजपा, सपा व बसपा के प्रत्याशियों ने अपने-अपने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया। आज प्रत्याशियों के भाग्य ईवीएम में कैद हो जाएंगे।