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1989 में पड़ी थी डकैती: 34 साल लग गए फाइल को निचली अदालत से सेशन कोर्ट पहुंचने में, 15 अप्रैल को सुनवाई

Mon, 01 Apr 2024 11:56 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

नर्वल में 1989 में पड़ी डकैती के मामले में 15 अप्रैल को दूसरी गवाही होनी है। वादी व तीन आरोपियों की मौत हो चुकी है। जबकि एक आरोपी फरार है और दो के खिलाफ सुनवाई शुरू हुई।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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अदालतों में मुकदमों का अंबार है। पुराने मुकदमों के जल्द निस्तारण के लिए हाईकोर्ट और शासन लगातार मॉनीटरिंग करता रहता है, इसके बावजूद लापरवाही के चलते मुकदमों में बेवजह तारीखें लगाकर फाइलों को डंप रखा जाता है। ऐसा ही नर्वल में पड़ी डकैती के मुकदमे में देखने को मिला। मुकदमे से संबंधित फाइल 34 साल बाद निचली अदालत से सेशन कोर्ट भेजी गई। अब इस मुकदमे में कोर्ट ने आरोप तय कर गवाही शुरू कराई है।

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इस दौरान वादी और तीन आरोपियों की भी मौत हो चुकी है। कितने गवाह जीवित हैं, इसका भी कोई पता नहीं है। नर्वल थाना क्षेत्र के रायपुर निवासी लाल सिंह के घर पर सात फरवरी 1989 की रात 25-30 डकैत घुस गए। इनमें से कुछ पुलिस की वर्दी में थे। डकैतों ने नरेंद्र पाल सिंह की पत्नी कुंवरकली, बेटे नागेंद्र सिंह व जुगेंद्र सिंह और घर की औरतों को लाठी व बंदूकों के कुंदों से मारकर नकदी व गहने लूट लिए थे। शोर सुनकर पड़ोसियों ने ललकारा तो फायरिंग भी की थी। इससे ओंकार सिंह छर्रे लगने से घायल हो गए थे।

लालसिंह ने नर्वल थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। एडीजीसी हरिशंकर शुक्ला ने बताया कि पुलिस ने अजीज, अशोक सिंह, नियाज अहमद उर्फ मुन्ना, नसीरुद्दीन उर्फ भोला, संतोष कुमार मिश्रा व महेंद्र सिंह यादव के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट भेजी थी। 34 साल तक फाइल निचली अदालत में ही तारीखों पर चलती रही। इस दौरान आरोपी अजीज, अशोक सिंह व नसीरुद्दीन उर्फ भोला की मौत हो गई। 16 अक्तूबर 2023 को धारा 299 सीआरपीसी की कार्रवाई करते हुए नियाज को फरार घोषित कर उसकी फाइल अलग कर दी गई।
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संतोष कुमार मिश्रा व महेंद्र सिंह की फाइल सेशन कोर्ट भेजी गई। इसके बाद 10 नवंबर 2023 को आरोप बना और 26 फरवरी 2024 को तहरीर लिखने वाले प्रवीण कुमार सिंह की पहली गवाही अपर जिला जज सप्तम आजाद सिंह की अदालत में हुई। अब 15 अप्रैल को दूसरी गवाही होनी है। रिपोर्ट दर्ज कराने वाले लाल सिंह की भी मौत हो चुकी है।

डकैती जैसे संगीन अपराध की फाइल तीन दशक तक सेशन कोर्ट ही नहीं भेजी गई। अब 34 साल पुरानी घटना में गवाहों को खोजकर गवाही के लिए कोर्ट बुलाना टेढ़ी खीर है। कई गवाहों की मौत हो चुकी होगी तो पुलिस के गवाहों का भी दूसरे जिलों में स्थानांतरण हो गया होगा। तीन आरोपियों की मौत हो चुकी है। बाकी के दो भी वृद्धावस्था में हैं। मुकदमे में जल्द गवाही पूरी कराकर निस्तारण की कोशिश की जाएगी।- हरिशंकर शुक्ला, एडीजीसी, फौजदारी

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