लालसिंह ने नर्वल थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। एडीजीसी हरिशंकर शुक्ला ने बताया कि पुलिस ने अजीज, अशोक सिंह, नियाज अहमद उर्फ मुन्ना, नसीरुद्दीन उर्फ भोला, संतोष कुमार मिश्रा व महेंद्र सिंह यादव के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट भेजी थी। 34 साल तक फाइल निचली अदालत में ही तारीखों पर चलती रही। इस दौरान आरोपी अजीज, अशोक सिंह व नसीरुद्दीन उर्फ भोला की मौत हो गई। 16 अक्तूबर 2023 को धारा 299 सीआरपीसी की कार्रवाई करते हुए नियाज को फरार घोषित कर उसकी फाइल अलग कर दी गई।
संतोष कुमार मिश्रा व महेंद्र सिंह की फाइल सेशन कोर्ट भेजी गई। इसके बाद 10 नवंबर 2023 को आरोप बना और 26 फरवरी 2024 को तहरीर लिखने वाले प्रवीण कुमार सिंह की पहली गवाही अपर जिला जज सप्तम आजाद सिंह की अदालत में हुई। अब 15 अप्रैल को दूसरी गवाही होनी है। रिपोर्ट दर्ज कराने वाले लाल सिंह की भी मौत हो चुकी है।
डकैती जैसे संगीन अपराध की फाइल तीन दशक तक सेशन कोर्ट ही नहीं भेजी गई। अब 34 साल पुरानी घटना में गवाहों को खोजकर गवाही के लिए कोर्ट बुलाना टेढ़ी खीर है। कई गवाहों की मौत हो चुकी होगी तो पुलिस के गवाहों का भी दूसरे जिलों में स्थानांतरण हो गया होगा। तीन आरोपियों की मौत हो चुकी है। बाकी के दो भी वृद्धावस्था में हैं। मुकदमे में जल्द गवाही पूरी कराकर निस्तारण की कोशिश की जाएगी।- हरिशंकर शुक्ला, एडीजीसी, फौजदारी