ठंड में मार्निंग वॉक करने जा रहे हैं तो जरा ये खबर पढ़ लें। शहर में प्रदूषण को लेकर जुटाए गए क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण विभाग के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। आधी रात से सुबह दस बजे तक शहर में प्रदूषण की मात्रा सबसे ज्यादा रिकार्ड की गई है।
यह मार्निंग वॉक पर निकलने वालों के लिए चिंता का विषय है। वहीं, स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए भी सुबह की हवा फायदेमंद नहीं है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रदूषण फैलाने में सर्वाधिक भूमिका बदहाल सड़कों की है।
विभागीय रिपोर्ट के अनुसार पूरे दिन प्रदूषण का औसत 150 से 250 माइक्रोग्राम दर्ज किया गया है। यह मात्रा रात 12 बजे से सुबह 10 के बीच 150 से 300 माइक्रोग्राम से ज्यादा हो जाती है। सामान्य तौर पर इस समय प्रदूषण की मात्रा 100 माइक्रोग्राम होनी चाहिए।
दरअसल, ठंड के मौसम में तापमान कम होने की वजह से धूल के कण ऊपर नहीं जा पाते हैं। वहीं, गर्मियों में धूल के कणों की मात्रा काफी कम होती है। क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी टीयू खान के बताया कि जहां पर सड़कें ज्यादा खराब हैं या खुदाई करके मिट्टी उसी जगह छोड़ दी जाती है, उन क्षेत्रों में प्रदूषण की मात्रा सबसे अधिक है।
ठंड बढ़ते ही बढ़ गए मरीज
ठंड बढ़ने के साथ ही अस्थमा मरीजों की संख्या अचानक बढ़ी है। कई मरीजों को फेफड़ों में इंफेक्शन के साथ निमोनिया भी होने की शिकायत मिली है।
मुरारी लाल चेस्ट अस्पताल के विभागाध्यक्ष डॉ. आनंद कुमार के अनुसार अस्थमा मरीजों के लिए ठंड सबसे खतरनाक है। तेज सांस चलने के कारण वातावरण की धूल और कण सीधे फेफड़े में चले जाते हैं।
इस तरह करें बचाव
अस्थमा पीड़ित यदि बाहर निकले तो मास्क भी लगा लें। यदि मास्क लगाना संभव नहीं है तो मुंह और नाक पर रुमाल जरूर बांध लें। सांस की बीमारी से ग्रसित लोगों को इस मौसम में धूल, मिट्टी, धुआं, धुंध, बीड़ी-सिगरेट से दूरी बना लेनी चाहिए। मरीज अपने पास इनहेलर जरूर रखे। डायबिटीज मरीज खास ध्यान रखें, पैर खुला न रखे।