क्षेत्रीय विधायक अमिताभ बाजपेई मामले की जानकारी लेते हुए
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14 मार्च को मंजू भट्टाचार्य और उसके कुछ दिन बाद सीता गुप्ता ने लाखों रुपये के जेवरात लॉकर से चोरी होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद बुधवार तक नौ लॉकरों से गहने गायब होने का पता चला। लॉकर इंचार्ज शुभम मालवीय अब भी फरार है। रायपुरवा स्थित फ्लैट पर भी ताला पड़ा है। बनारस से आए विजिलेंस अफसर रोहित निगम ने सुबह शाखा पहुंचकर लॉकरों से जुड़े पीड़ितों की ओर से दी गई शिकायत, अब तक की कार्रवाई, सीसीटीवी फुटेज, लॉकर रूम आदि को देखा। स्टाफ से अलग-अलग पूछताछ की। सेंट्रल बैंक आफ इंडिया के क्षेत्रीय प्रबंधक दयानंद पांडेय ने विजिलेंस जांच शुरू होने की पुष्टि की है।
दो प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड भी संदिग्ध
सूत्रों ने बताया कि बैंक में कुछ समय पहले तक प्राइवेट गार्ड काम करते थे। वो कोरोना काल में भी रहे। इस दौरान बैंकों में कामकाज बेहद सीमित था। इनकी पहुंच बैंक के हर कोने तक थी। लेकिन बाद में इन्हें हटा दिया गया, हालांकि इन्हें क्यों हटाया गया इसकी जानकारी किसी के पास नहीं है। ऐसे में इन प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है।
नोएडा से लॉकर चेक करने पहुंचे, ली राहत की सांस
बैंक में गुरुवार को सुबह करीब 13 ग्राहक शाखा खुलने के साथ पहुंच गए थे। सभी ने एक-एक कर अपने लॉकर चेक किए। जनरलगंज निवासी विजय चौधरी, आनंदपुरी निवासी विनोद जैन, सिविल लाइंस निवासी राधे गुप्ता, पत्नी गीता देवी के साथ लॉकर चेक करने पहुंचे। गाजियाबाद से आए एके बाजपेयी ने बताया कि अखबार में लॉकर से सामान चोरी होने की खबरें पढ़कर लॉकर चेक करने पहुंच गए। सारा सामान सुरक्षित देख सभी ने राहत की सांस ली।
विधान सभा में उठाएंगे मामला
क्षेत्रीय विधायक अमिताभ बाजपेई भी गुरुवार को बैंक शाखा पहुंचे। यहां पर मौजूद चौकी इंचार्ज प्रमोद कुमार से मामले की जानकारी ली। वहीं बाद में पत्रकारों से कहा कि बैंक लॉकरों को सबसे सुरक्षित माना जाता है लेकिन अब लॉकर भी सुरक्षित नहीं है। पूरे मामले की जांच की जाए और मामले का जल्द से जल्द खुलासा किया जाए। उन्होंने कहा कि विधान सभा में भी मामला उठाया जाएगा।