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Kanpur News: सत्तू और नमकीन बनाकर आत्मनिर्भर बनीं समूह की महिलाएं

Thu, 11 Sep 2025 01:17 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
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कानपुर देहात। कहते हैं अगर किसी काम को करने का दृढ़-संकल्प कर लिया जाए, तो उसे पूरा होने से कोई नहीं रोक सकता है। यह अकबरपुर ब्लॉक के अंदाया ग्राम पंचायत की महिलाओं ने कर दिखाया है। यहां की 10 महिलाओं ने आपस में मिलकर समूह बनाया और चने से सत्तू, बेसन, नमकीन आदि उत्पाद बनाने का काम शुरू किया। अब इनके बनाए उत्पाद दिल्ली, प्रयागराज, अयोध्या व लखनऊ तक जा रहे हैं।
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राज्य ग्रामीण रोजगार मिशन की जिला मिशन प्रबंधक पूजा वर्मा ने बताया कि समूह की महिलाओं ने संपर्क कर स्वयं का कारोबार शुरू करने की इच्छा जाहिर की। इसके लिए इन्हें प्रशिक्षण दिया गया और कारोबार कैसे शुरू करें, इसकी जानकारी दी गई। इन्होंने किसी प्रकार का ऋण न लेकर आपस में पांच हजार रुपये एकत्रित कर कारोबार शुरू किया। अब यह 50 हजार रुपये तक पहुंच गया है। इनके बनाए उत्पाद को दिल्ली, प्रयागराज, लखनऊ, अयोध्या जैसे स्थानों पर लगने वाले मेले की स्टाल में बिक्री के लिए उपलब्ध कराया जाता है। यहां आने वाले लोग सत्तू, बेसन आदि को पसंद करते हैं।
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दिवाली में गोबर के दीया, होली में गुलाल से बिखेरती हैं रंग
चने से बने उत्पादों के अलावा समूह की महिलाएं दीपावली पर्व पर गोबर के दीया, मोमबत्ती बनाती है। वहीं होली में गुलाल को बनाकर बिक्री कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। समूह की सुनीता बताती है कि गोबर के बने दीया वातावरण को शुद्ध करते हैं, शुभ माने जाते हैं। यह इको-फ्रेंडली होते हैं। इसके अलावा, गाय का गोबर हिंदू धर्म में बहुत पवित्र माना जाता है। जबकि गुलाल में किसी तरह के केमिकल का उपयोग नहीं किया जाता है। जो होली खेलने के दौरान त्वचा को हानि नहीं पहुंचाता है। इसके साथ कैरी बैग, पोस्ट ऑफिस व अन्य कार्यालयों में प्रयोग होने वाला लिफाफा भी बनाया जाता है।
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वर्जन............
आपसी सहयोग से आगे बढ़ाया कारोबार
समूह की महिलाओं ने प्रशिक्षण लेकर चने के उत्पाद बनाने के साथ गुलाल, मोमबत्ती आदि का कारोबार शुरू किया है। सबसे बड़ी बात इन्होंने आपसी सहयोग से कारोबार आगे बढ़ाया है। जो अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का श्रोत है। - गंगाराम, उपायुक्त, एनआरएलएम
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समूह बनाकर ऐसे शुरू करें कारोबार
उपायुक्त एनआरएलएम गंगाराम ने बताया कि समूह बनाने के लिए कम से कम 10 महिलाओं का होना जरूरी है। वह अध्यक्ष, कोषाध्यक्ष व सचिव का चुनाव करेंगी। इन्हें किसी भी बैंक में खाता खुलवाकर प्रतिमाह प्रति महिला 50 या उससे अधिक रुपये जमा करना होगा। पांच माह या उससे अधिक समय के बाद राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के लोकओएस पोर्टल पर डाटा अपलोड करना होता है। इसके बाद समूह को उनके कौशल के अनुसार प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। प्रशिक्षण पाने के बाद स्टार्टअप के लिए बैंक से 25 हजार रुपये का ऋण मिलता है। कारोबार शुरू करने के तीन माह बाद 30 हजार व छह माह बाद सामुदायिक निवेश निधि से 1.5 लाख रुपये का ऋण ले सकती हैं। बैंक से मिले ऋण का 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से जमा करना होता है।



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ये बना सकते हैं समूह
समूह बनाने के लिए महिलाओं के पास पात्र गृहस्थी कार्ड धारक, किसान सम्मान निधि या फिर प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ लेने वाली होनी चाहिएं। इसमें 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाएं भी शामिल हो सकती हैं। जबकि दिव्यांग होने की स्थिति में स्त्री या पुरुष पांच-पांच लोग आपस में मिलकर समूह बना सकते हैं।
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छोटे स्तर से शुरू किया कारोबार
घर की आर्थिक स्थिति सही न होने के कारण छोटे स्तर से कारोबार को शुरू किया। इसमें समूह की सभी महिलाओं ने मिलकर सौ रुपये प्रतिमाह एकत्रित करना शुरू किया। पांच महीने बाद काम को शुरू किया। अब कारोबार 50 हजार रुपये तक पहुंच गया है। सभी महिलाओं की आमदनी हो रही है और आत्मनिर्भर बन रही हैं। - सुनीता देवी, अंदाया, अकबरपुर
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पहले चने का बना सत्तू, बेसन आदि का कारोबार शुरू किया। सभी ने मिलकर इसके साथ दूसरे काम को करने का निर्णय लिया और गोबर के दीपक, गुलाल, मोमबत्ती आदि बनाने का प्रशिक्षण लिया। त्योहार के हिसाब से काम कर आमदनी की जा रही है। स्वयं से रुपये कमाकर परिवार में सहयोग करने पर खुशी होती है। - उमा देवी, अंदाया, अकबरपुर
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