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Kanpur News: युद्ध से डिटर्जेंट उद्योग डगमगाया, 150 करोड़ का कारोबार प्रभावित

Mon, 16 Mar 2026 01:19 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
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रनियां (कानपुर देहात)। ईरान-इस्राइल और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध का असर पूरी तरह से जिले की औद्योगिक इकाइयों पर पड़ रहा है। प्लास्टिक, कपड़ा कारोबार के बाद अब डिटर्जेंट उद्योग डगमगा गया है। उद्यमियों का कहना है कि डिटर्जेंट बनाने में प्रयोग होने वाले केमिकल की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इससे कीमत ढाई गुनी हो गई है। करीब 150 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हो गया है।
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रनियां व जैनपुर औद्योगिक क्षेत्र में पाउडर बनाने की करीब 140 फैक्टरियां संचालित हैं। इनमें उत्पादन 60 से 70 प्रतिशत तक घट गया है। हालात यह हैं कि पिछले तीन-चार दिन से कई इकाइयों में उत्पादन क्षमता का केवल 30 प्रतिशत काम हो पा रहा है। जिससे करीब 150 करोड़ रुपये के कारोबार पर असर पड़ा है। उद्यमियों के अनुसार अभी तक इन इकाइयों में प्रतिदिन करीब 20 से 30 करोड़ रुपये के डिटर्जेंट पाउडर और लिक्विड साबुन का उत्पादन होता है।
उद्यमियों के मुताबिक युद्ध के कारण डिटर्जेंट निर्माण में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख केमिकल लीनियर अल्काइल बेंजीन की आपूर्ति प्रभावित हो गई है। यह केमिकल मुख्य रूप से ईरान और सऊदी अरब से आयात किया जाता है। आपूर्ति प्रभावित होने से पिछले 20 दिनों में इसकी कीमत 130 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर करीब 270 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गई है। कच्चे माल की कमी और कीमत बढ़ने से फैक्टरियों में उत्पादन लागत बढ़ गई है।
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कई इकाइयों में पिछले एक सप्ताह से काम प्रभावित है और उत्पादन क्षमता का करीब 30 प्रतिशत ही काम हो पा रहा है। इससे उद्योगों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। युद्ध के कारण सूक्ष्म एवं मध्यम उद्योग सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। कच्चा माल समय पर नहीं मिल पा रहा है और कीमत भी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे हालात में लघु उद्यमियों के लिए उत्पादन जारी रखना मुश्किल हो गया है। उन्होंने सरकार से उद्योगों को राहत देने की मांग की है।

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नहाने के साबुन में यह होता प्रयोग
लघु उद्योग भारती के महामंत्री/उद्यमी हिमांशु सिंह ने बताया कि नहाने वाले साबुन में ताड़ की गिरी के तेल या नारियल के तेल को सोडियम हाइड्रॉक्साइड (कास्टिक सोडा) के साथ साबुन बनाकर तैयार किए जाते हैं। यह फैटी एसिड के सोडियम लवण होते हैं। वनस्पति तेल (80-90%) ताड़ की गिरी का तेल सबसे आम हैं। क्षार/कास्टिक सोडा तेलों को साबुन में बदलने के लिए साबुनीकरण किया जाता है। नारियल/कर्नेल तेल का मिश्रण अच्छी कठोरता और झाग के लिए उपयोग किया जाता है।
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कपड़े धोने का साबुन:
उद्यमियों के मुताबिक इसमें कम ग्रेड के तेल के साथ-साथ सोडियम सिलिकेट और काओलिन जैसे फिलर्स का उपयोग किया जाता है। इस समय इसकी आपूर्ति मांग के अनुसार नहीं हो पा रही है।
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केमिकल लीनियर अल्काइल बेंजीन की वर्तमान कीमत: करीब 270 रुपये प्रति किलोग्राम
डिटर्जेंट फैक्टरियां : लगभग 140
प्रतिदिन उत्पादन : 20-30 करोड़ रुपये
उत्पादन में गिरावट : करीब 70 प्रतिशत
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युद्ध की वजह से घट गया उत्पादन

युद्ध के कारण सबसे ज्यादा असर प्लास्टिक के दाने और डिटर्जेंट में प्रयोग होने वाले केमिकल पर पड़ा है। दोनों के दाम तेजी से बढ़े हैं। इससे रनियां और जैनपुर औद्योगिक क्षेत्र की फैक्टरियों में उत्पादन घट गया है और कई इकाइयां बंद होने की कगार पर पहुंच गई है। - हिमांशु सिंह, महामंत्री लघु उद्योग भारती

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मायूसी से साथ चल रहा प्लांट, उत्पादन कम
युद्ध के कारण डिटर्जेंट में प्रयोग होने वाला केमिकल और अन्य कच्चा माल महंगा हो गया है। इससे उत्पादन प्रभावित है और लघु उद्योग संकट में हैं। केमिकल के दाम दोगुने होने से उत्पादन लागत बढ़ गई है। फैक्टरी में डिटर्जेंट और प्लास्टिक दोनों का उत्पादन प्रभावित हुआ है। - उदय वीर, उद्यमी
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