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Kanpur News: दो माह तक घर से नहीं निकला था भयभीत परिवार

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कानपुर। मुफ्त में प्लाॅट न मिलने पर तत्कालीन महाराजपुर थाना प्रभारी विद्यासागर त्रिपाठी ने नियमों को ताक पर रखकर फर्जी एनकाउंटर में कई लोगों को जेल भेज दिया। सीबीसीआईडी ने जांच की तो फर्जी मुठभेड़ की कहानी सामने आई। 35 साल बाद छह मृत पुलिसकर्मियों को छोड़कर बाकी 12 के खिलाफ महाराजपुर में सीबीसीआईडी ने रिपोर्ट दर्ज कराई। वहीं, घटना में उस वक्त फर्जी मुठभेड़ में जेल भेजे गए लालजी कुशवाहा ने भी आपबीती सुनाई है। उनका का कहना है कि वे लोग तो न्याय की आस ही छोड़ चुके थे। उनका भयभीत परिवार दो महीने तक घर से बाहर नहीं निकला था।
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चकेरी के गांधीग्राम निवासी देवी प्रसाद पाठक ने महाराजपुर के तत्कालीन थाना प्रभारी पर उनके भाई और 12 लोगों को झूठे मुकदमे में फंसाकर जेल भेजने का आरोप लगाया था। पीड़ितों में चकेरी रामादेवी चौराहे के पास रहने वाले लालजी कुशवाहा भी शामिल थे। उन्होंने बताया कि घटना के वक्त वह 22 साल के थे। उनकी रामादेवी चौराहे पर मार्केट है। उसमें 35 साल पहले उनके बाबा मनोहर के नाम से होटल था। रामादेवी चौराहे पर उस दौरान सिर्फ एक होटल था। जिसमें नेता, प्रॉपर्टी डीलर समेत अन्य लोग आकर बैठते थे। इसी बात से पुलिस खुन्नस रखती थी।
लालजी ने बताया कि वर्ष 1991 में वह अपने घर पर सो रहे थे। रात एक बजे एक-एक कर कई पुलिसकर्मियों की गाड़ी आईं। सभी अंदर घुसे और उन्हें उठा ले गए थे। परिजन ने जब कारण पूछा तो पूछताछ की बात कही थी। इसके बाद पूरी रात पुलिस ने लाठी-डंडों से पीटा। जेल जाने के दौरान पता चला कि 11 और भी लोग साथ में भेजे गए हैं। लालजी के मुताबिक घटना के वक्त परिवार में चार भाई, चार बहनें और माता-पिता थे। घटना के दौरान दो बहनों की शादी हो गई थी। परिवार में आठ लोग थे।
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घटना के बाद सभी अगले दिन थाने पहुंचे। पुलिसकर्मियों ने उनको मिलने नहीं दिया। करीब डेढ़ महीने बाद वह जब जेल से छूटे। इसके बाद परिवार न्याय की आस भूल चुका था। ऐसे ही चकेरी के सफीपुर प्रथम निवासी कल्लू उर्फ सुरेंद्र द्विवेदी को भी पुलिस ने आरोपी बनाया था। उनकी 2021 में मौत हो चुकी है। उनके अधिवक्ता बड़े भाई वीरेंद्र द्विवेदी ने बताया कि पुलिस सुरेंद्र को बिना बताए उठा ले गई थी। वीरेंद्र का कहना है कि भाई सुरेंद्र का देवी प्रसाद पाठक से कोई मतलब नहीं था।


इंसेट

एक पुलिसकर्मी ने पैर पर फोड़ दिया था ग्लास

लालजी ने बताया कि घटना के दौरान जब उन्हें पूछताछ के लाया गया तो इस दौरान सभी पुलिसकर्मी शराब पी रहे थे। इसमें एक पुलिसकर्मी ने उनके पैर में ग्लास फोड़ दिया था।
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