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Kanpur News: सुविधाएं न होने से दम तोड़ रही व्यवस्था, रेफर हो रहे नवजात

Fri, 08 Aug 2025 12:44 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
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कानपुर देहात। मेडिकल कॉलेज के महिला अस्पताल में संचालित एसएनसीयू (सिक एंड न्यू बॉर्न केयर यूनिट) में सुविधाओं के अभाव से व्यवस्था दम तोड़ती दिखाई दे रही हैं। किसी को बेड खाली न होने तो किसी को बेहतर इलाज की सुविधा न मिल पाने पर रेफर किया जा रहा है। बुधवार को एक नवजात को यहां रेफर किया गया था। परिजन का आरोप था कि अस्पताल के स्टॉफ ने बच्चे को भर्ती नहीं किया जिससे उसकी मौत हो गई। हालांकि इस पूरे प्रकरण पर सीएमएस का कहना था कि परिजन बच्चे को लेकर ग्राउंड फ्लोर पर ही टहलते रहे थे।
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गुरुवार को एसएनसीयू की व्यवस्था जांचने के लिए स्टाफ के लोगों से जानकारी की गई तो कई समस्याएं निकल कर सामने आईं। 18 बेड की क्षमता वाली इस यूनिट में वेंटीलेटर की व्यवस्था नहीं है। समय से पहले जन्में, या फिर कम वजन के बच्चों की हालत बिगड़ने पर वेंटीलेटर की जरूरत पड़ती है। यही वजह है कि नवजात की हालत बिगड़ती है तो उसको सीधे रेफर किया जाता है। ऐसे में एक तरफ तीमारदार परेशान होते हैं और दूसरी तरफ भर्ती मां की चिंता भी बढ़ जाती है।
महिला अस्पताल में रोजाना आठ से दस प्रसव होते हैं। इनमें से एक-दो मामले ऐसे होते हैं, जिनमें समय से पहले शिशु का जन्म, कम वजन की समस्या रहती है। बच्चे की स्थिति गंभीर होने पर चिकित्सक एसएनसीयू में भर्ती करने की सलाह दे देते हैं। मगर कई सुविधाएं न होने व बेड फुल रहने पर बच्चों को रेफर किया जा रहा है। स्वास्थ्य कर्मियों ने दबी जुबान से नाम न छापने की बात पर बताया कि जितनी क्षमता है, उससे अधिक बच्चे यहां भर्ती रहते हैं। पूरा स्टाफ कोशिश करता है कि बच्चे जल्द स्वस्थ्य हों, लेकिन कुछ सुविधाएं न होने से रेफर करना उनकी मजबूरी है। गुरूवार को एसएनसीयू में 25 नवजात भर्ती मिले।
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नहीं किया भर्ती, हो गई नवजात की मौत
डेरापुर के सनिहापुर अहिराना की रानी देवी ने बुधवार को सीएचसी में नवजात को जन्म दिया था। हालत बिगड़ने पर उसे डॉक्टर ने एसएनसीयू में भर्ती करने की सलाह दी। मेडिकल कॉलेज पहुंचने पर स्टाफ ने बेड न होने की बात कह सैफई व कानपुर ले जाने की बात कही। रानी के पति शिव गोपाल व उनके साथ आई आशा ने नवजात को भर्ती करने की गुहार लगाई। मगर बच्चे को भर्ती नहीं किया गया, कुछ देर बाद परिसर में ही नवजात की मौत हो गई।
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यह है एसएनसीयू की व्यवस्था
एसएनसीयू में तैनात कर्मचारियों के मुताबिक बच्चों को भर्ती कर इलाज करने के लिए 18 बेड की क्षमता है। यहां पर प्रतिदिनि 20 से 25 बच्चे भर्ती रहते हैं। कर्मचारियों के मुताबिक यहां पर एक भी वेंटीलेटर नहीं है। दो सीपैप मशीन हैं, इन्हीं से काम चलाया जा रहा है। 18 वार्मर तो हैं, मगर तीन की ट्राली ठीक नहीं है। इससे भी परेशानी होती है।
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36 दिन से भर्ती एक नवजात
एसएनसीयू के कर्मचारियों ने बताया कि सामान्य तौर पर बेहतर स्वास्थ्य देखभाल के लिए एक सप्ताह तक बच्चे निगरानी में रखे जाते हैं। कई बच्चे ऐसे रहते हैं, जिन्हें ठीक होने में 15 से 30 दिन तक लग जाते हैं। इस वजह से भी बेड की समस्या रहता है। एक कर्मचारी ने बताया कि रसूलाबाद के गढ़ेवा के रहने वाले नरेश की पत्नी पूजा ने बेटे को जन्म दिया था। बेटा कमजोर था, इस पर उसे एसएनसीयू में रखा गया। वह 36 दिन से भर्ती है। इस तरह कई बच्चे हफ्तों भर्ती रहते हैं।
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इन सुविधाएं की दरकार
एसएनसीयू के कर्मचारियों के मुताबिक बच्चों में जन्म लेने के बाद कई तरह की बीमारियां, कमजोरी, कम वजन जैसी समस्याएं निकल सामने आती है। इनमें से कई बच्चों को एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड व खून से संबंधित जांचे कराने की जरूरत पड़ती है। कर्मचारियों ने बताया कि पोर्टल मशीन नहीं है। सी-यूएसजी(अल्ट्रासउंड), आरओपी, ओएई जांच की सुविधा नहीं हैं।
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तीन माह में भर्ती व रेफर नवजात
माह भर्ती रेफर
मई- 66 बच्चे 10 बच्चे
जून 100 बच्चे 15 बच्चे
जुलाई 98 बच्चे 13 बच्चे
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बयान...
एसएनसीयू में वेंटीलेटर की व्यवस्था नहीं हैं। एनआईसीयू में इसकी व्यवस्था होती है। आरओपी जांच की व्यवस्था नहीं है, इसके लिए हैलट रेफर किया जाता है। उच्च स्तर के उपकरण मंगवाए जा रहे हैं। कुछ सुविधाएं बढ़ाने की प्रक्रिया चल रही है। जिससे बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। बुधवार को एक आशा आई थी, डॉक्टर विनय ने बताया था कि बेड खाली नहीं है, 30 बच्चे भर्ती हैं। उसे कानपुर भेजना पड़ेगा। परिवार के लोग आपसी सहमति बनाते रहे, नवजात को भर्ती करने की नौबत नहीं आई, गंभीर स्थिति थी और उसकी मौत हो गई। - डॉ. वंदना सिंह, सीएमएस
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