फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kanpur News: छतेनी स्थित मिल्क इंडस्ट्री से निकल रहा बदबूदार पानी बना ग्रामीणों के लिए परेशानी

Sat, 17 Jan 2026 02:08 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
विज्ञापन
विज्ञापन
पुखरायां। भोगनीपुर तहसील के छतेनी गांव स्थित भोले बाबा मिल्क इंडस्ट्रीधौलपुर छतेनी के केमिकल युक्त गंदे और बदबूदार पानी को तालाब में डाला जा रहा है। जिसकी बदबू से आसपास के लोगों का जीना मोहाल हो गया है। बीमारी फैलने का खतरा भी बना हुआ है। शिकायत के बाद जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के चलते समस्या हो रही है।
विज्ञापन

छतेनी स्थित भोले बाबा मिल्क इंडस्ट्री धौलपुर छतेनी के प्लांट से दूषित पानी पीछे स्थित तालाब जिसमें मत्स्य पालन का सरकारी पट्टा दिया गया है उसमें डाला जा रहा है। इससे आसपास खेतों में खड़ी किसानों की फसल भी प्रभावित हो रही है। ग्रामीण अभिषेक, अजय कुमार, राजकुमार सविता ने बताया कि मुख्यमंत्री पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई है। अधिकारियों की उदासीनता से फैक्टरी के कर्मचारी अपनी मनमानी कर रहे हैं। आरोप है कि रात के अंधेरे में पानी सरकारी जगह में भर देते हैं। फैक्टरी के पानी के जलभराव की जगह से बदबू के कारण निकलना तक मुश्किल है। पर्यावरण भी प्रदूषित हो रहा है। एसडीएम देवेंद्र सिंह ने बताया कि प्रदूषण विभाग को पत्र लिखकर जांच कराएंगे। इसके बाद कार्रवाई की जाएगी।
..................

तालाब का गलत हो रहा इस्तेमाल
फोटो-07- तत्कालीन एसडीएम को दिया गया शिकायती पत्र दिखाते रावेंद्र और परिवारजन। संवाद
पुखरायां। छतेनी के मजरा दीक्षिताईनपुर निवासी शिवकुमार, जीतेंद्र, रावेंद्र, ने बताया कि उनके पिता घसीटे और चाचा राजाराम के नाम गाटा संख्या 184 पर तालाब का पट्टा कई वर्षों से रहा। उसमें वह लोग सिंघाड़ा की फसल बोते थे। बताया कि परिवार के लोग सिंघाड़ा की फसल कर परिवार का पालन पोषण कर रहे थे। फैक्टरी निर्माण के समय 2024 में तैयार सिंघाड़ा की फसल को फैक्टरी के कर्मचारियों ने जबरन नष्ट कर दी थी। जिसकी शिकायत तत्कालीन एसडीएम से की तो कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद में बिना जानकारी के तालाब का पट्टा गांव के दूसरे व्यक्ति के नाम कर दिया गया। इसके बाद जिसके नाम पट्टा हुआ उसने कोई फसल नहीं बोई और तालाब फैक्टरी संचालक को मासिक किराए में दे दिया। इसके बाद से तालाब में दूषित पानी जा रहा है। इससे हर कोई परेशान है। एसडीएम देवेंद्र सिंह ने बताया कि पूर्व की शिकायत व तालाब की जांच कराई जाएगी। (संवाद)
विज्ञापन




ईटीपी प्लांट से करें पानी का ट्रीटमेंट
ग्रामीणों ने बताया कि फैक्टरी में निकलने वाले दूषित पानी का ईटीपी प्लांट से ट्रीटमेंट कर बाहर छाेड़ा जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। दूषित पानी किसानों के लिए खतरनाक है। एनजीटी के नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। वहीं ग्रामीण सुरेंद्र कुमार, शशिकांत शुक्ल ने बताया कि तालाब की खुदाई कराई गई है। इसी में फैक्टरी का गंदा पानी भरा जा रहा है। कंपनी के सुपरवीजन कर रहे गुरुप्रसाद ने बताया कि ईटीपी प्लांट लगा है जो अभी प्राेसेसिंग में है। एक महीने बाद फैक्टरी का पानी बाहर नहीं निकलेगा।
...................

क्या है ईटीपी प्लांट
ईटीपी प्लांट का तात्पर्य ट्रीटमेंट प्लांट है। जिसका मतलब अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र है। यह औद्योगिक प्रक्रियाओं से निकलने वाले दूषित पानी को साफ करने के लिए एक ऐसी प्रणाली है जो हानिकारक रसायनों और पदार्थों को हटाकर उसे पर्यावरण में सुरक्षित रूप से छोड़ने या पुन: उपयोग करने लायक बनाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें