कानपुर। हैलट अस्पताल में अप्रैल 2024 से शुरू हुआ डे केयर वार्ड महिलाओं में खून की कमी (एनीमिया) की समस्याओं को दूर कर रहा है। छह हीमोग्लोबिन स्तर तक गंभीर श्रेणी की गर्भवती पांच से छह महिलाओं को रोजाना डे केयर वार्ड में खून चढ़ाया जा रहा है। इससे पहले महिलाओं को खून चढ़ाने या ड्रिप के जरिए इंजेक्शन देने के लिए अस्पताल में भर्ती करना पड़ता था। अस्पताल में भर्ती होने के झंझट से बचने के लिए 50 फीसदी महिलाएं इससे इन्कार कर देती थीं।
हैलट और डफरिन अस्पताल में रोजाना 600 से ज्यादा महिलाएं ओपीडी में आती हैं। इसमें से 50 फीसदी महिलाओं में खून की कमी पाई जा रही है। ऐसी महिलाओं का हीमोग्लोबिन का स्तर 12 से कम है। इतना ही नहीं 10 प्रतिशत महिलाओं का हीमोग्लोबिन सात से भी कम रहता है। साथ ही इनमें आयरन, कैल्शियम, विटामिन की कमी भी मिलती है।
हैलट अस्पताल के जच्चा बच्चा विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. रेनू गुप्ता ने बताया कि महिलाओं में खून की कमी की बढ़ती समस्या के चलते अप्रैल 2024 से एनीमिया डे केयर वार्ड की शुरुआत की गई। इससे यह फायदा मिला है कि जो महिलाएं भर्ती होने के डर से बाद में आने की बात कहकर लौट जाती थीं वह एक ही दिन में खून चढ़वाकर घर चली जाती हैं। उन्होंने बताया कि गुड़ चना, मौसमी सब्जी और फल, आंवला, अंकुरित चना, सोयाबीन की मात्रा आहार में शामिल करने से खून तेजी से बढ़ता है।
डफरिन अस्पताल की सीएमएस डॉ. रुचि जैन ने बताया कि अस्पताल में पहुंचने वाली हर तीसरी महिला में खून व अन्य पोषक तत्वों जैसे आयरन, कैल्शियम, विटामिन बी 12 की कमी देखी जाती है। काउंसलिंग में पता चलता है कि महिलाओं का जोर अच्छा खाना परिवार को खिलाने पर और खुद कुछ भी खा लेने पर रहता है। इसकी वजह से ही उनमें खून की कमी हो रही है।
फॉग्सी की चीफ पैट्रन व स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मीरा अग्निहोत्री ने बताया कि गरीब से लेकर धनाढ्य वर्ग की महिलाओं में पोषण की कमी है। पोषण की कमी सभी तत्वों की बराबर मात्रा लेने से दूर होगी। एनीमिया को दूर करने के लिए हम गांवों में जाकर महिलाओं को जागरूक कर रहे हैं।