कानपुर। हृदय रोगी, गंभीर लिवर, चेस्ट, थॉयराइड की समस्या वाले रोगियों को सर्जरी के लिए पूरी तरह बेहोश करना कई बार खतरनाक हो जाता है। डर रहता है कि रोगी वापस होश में आएगा या नहीं आएगा। इस तरह के रोगियों में सर्जरी के समय बीपी और हार्ट रेट में बहुत उतार-चढ़ाव भी होते हैं। इससे बचाव के लिए नई विधि सेगमेंटल स्पाइनल एनेस्थीसिया का इस्तेमाल हो रहा है। इसमें सिर्फ उस हिस्से को सुन्न किया जाता है जहां रोगी की सर्जरी होनी होती है। इससे डॉक्टर रोगी से बात करता रहता है और सर्जरी हो जाती है। इसमें रोगी का बीपी, हार्ट और सांस सब स्थिर रहता है।
यह जानकारी शनिवार को जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के एनेस्थीसिया विभाग की ओर से आयोजित कार्यशाला में विशेषज्ञों ने बताई और डॉक्टरों की टीम ने सर्जरी कक्ष से लाइव डेमो भी करके दिखाया। कार्यशाला में शहरभर के एनेस्थीसिस्ट शामिल हुए और सेगमेंट स्पाइनल व कन्टिन्यूअस स्पाइनल एनेस्थीसिया के बारे में जानकारी हासिल की। नए ऑडिटोरियम में कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि सेवन एयर कमोडोर डॉ. मुकुल भाटिया, उप प्राचार्य डॉ. रिचा गिरी, विभागाध्यक्ष डॉ. अपूर्व अग्रवाल ने की। कार्यक्रम में बरेली, इंदौर, दिल्ली आदि राज्यों से आए 125 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
इंदौर से आए डॉ. जावेद खान ने बताया कि सामान्य एनेस्थीसिया में पूरा शरीर सो जाता है और स्पाइनल एनेस्थीसिया में अक्सर कमर के नीचे का पूरा हिस्सा सुन्न हो जाता है। जब कमर के नीचे के हिस्से में सर्जरी करनी होती है तो इस विधि का उपयोग करते हैं लेकिन अब सेगमेंटल तकनीक आ गई है। इसमें हम रीढ़ की हड्डी के एक निश्चित स्तर पर दवा देते हैं ताकि केवल वही नसें प्रभावित हों जो शरीर के उस खास भाग (जैसे पेट या छाती) से जुड़ी हैं। इसके रोगी पूरी तरह होश में रहता है लेकिन सर्जरी वाले हिस्से में दर्द महसूस नहीं होता है। रिकवरी जल्दी होती है और फेफड़ों व हृदय पर दबाव कम पड़ता है।
अमरावती से आए डॉ. नरेश पालीवाल ने बताया कि इसके शुरू हो जाने से नौ साल से लेकर 90 साल तक के बुजुर्गों के सर्जरी की जा रही है। बरेली से आईं डॉ. रिचा चंद्रा, डॉ. शिशिर ने अपना व्याख्यान दिया। यहां डॉ. नेहा मिश्रा व डॉ. नीतू सिंह ने संचालन किया। यहां डॉ. वीणा अरोड़ा, डॉ. सीएस सिंह, डॉ. रश्मि, डॉ. जीडी यादव, डॉ. संजय सिंह, डॉ. रेनू गुप्ता, डॉ. सौरभ अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
18 सर्जरी करके दिखाया डेमो
कार्यशाला में डॉक्टरों की टीम ने सेगमेंटल एनेस्थीसिया देने का तरीका लाइव स्क्रीन पर दिखाया। इस दौरान 18 सर्जरी की गईं जिसमें हृदय, अस्थमा, बीपी की समस्या से जूझ रहे गंभीर रोगियों की ब्रेस्ट, गले में गांठ और पित्त की पथरी जैसी सर्जरी की गई। वे पूरी तरह होश में रहे और उनकी सफल सर्जरी रही।