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Kanpur News: ऑपरेशन से नसों में आई जान, फिर से काम करने लगे हाथ

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मरीज किशन व कुलदीप के साथ प्लास्टिक सर्जन डॉ. अतुल सक्सेना व डॉ. तंजुम कंबोज।  - फोटो : संवाद
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सैफई। उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में पहली बार ब्रेकियल प्लेक्सस सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। इससे दो मरीजों को नया जीवन मिला। अभी इस तरह की जटिल सर्जरी लखनऊ व दिल्ली जैसे महानगरों के चुनिंदा अस्पतालों में ही होती थी।
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कानपुर के नौबस्ता निवासी किशन कुमार (24) के बायें हाथ की नसें दुर्घटना में घायल होने से ब्लॉक हो गई थीं। अपना हाथ ठीक से हिला नहीं पा रहा था। कानपुर और लखनऊ के निजी अस्पतालों में सर्जरी पर तीन लाख रुपये से अधिक का खर्चा बताया गया। इससे सर्जरी नहीं करा सके। सैफई विश्वविद्यालय के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. अतुल सक्सेना और डॉ. तंजुम कंबोज ने दस हजार रुपये के शुल्क में सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया। अब वह स्वस्थ हो रहे हैं।
इसके अलावा सैफई के मध्यापुर गांव के 35 वर्षीय किसान कुलदीप कुमार के हाथ की नसें दुर्घटना में क्षतिग्रस्त हो गई थीं। इससे वह कोई भी काम नहीं कर पा रहे थे। सैफई विवि में ऑपरेशन के छह महीने बाद कुलदीप स्वस्थ हो रहे हैं।
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प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. अतुल सक्सेना व डॉ तंजुम कंबोज ने बताया कि ब्रेकियल प्लेक्सस नसों का जटिल नेटवर्क होता है, जो गर्दन से लेकर हाथों तक गति और संवेदनशीलता को नियंत्रित करता है। दुर्घटना या चोट के कारण यह प्रभावित हो सकता है। इससे हाथ में कमजोरी, सुन्नता या लकवा हो सकता है। इसके ऑपरेशन का सबसे सही समय चोट के तीन से छह महीने के भीतर होता है। ऑपरेशन देर से करने पर परिणाम उतने अच्छे नहीं मिलते। कुलपति प्रो. डॉ. पीके जैन, प्रतिकुलपति डॉ. रमाकांत यादव, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसपी सिंह, कुलसचिव डॉ. चंद्रवीर सिंह ने प्लास्टिक सर्जन टीम को बधाई दी।
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