कानपुर। बोगस फर्म के सहारे करोड़ों का व्यापार दिखा इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ लेने वाले शातिरों की लोकेशन गोरखपुर और उसके आसपास के जिलाें में मिली है। पुलिस और क्राइम ब्रांच ने वहां डेरा डाला है। उनके नेपाल भागने की आशंका पर क्षेत्र की पुलिस के साथ नजर रखी जा रही है। अब तक दो आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है जबकि पांच अन्य की तलाश जारी है। गिरोह ने लोन दिलाने का झांसा देकर आवेदकों के दस्तावेज के सहारे 38 बोगस फर्म बनाकर खेल किया। प्रारंभिक जांच में नौ बैंकों के खातों से 250 करोड़ रुपये के लेनदेन की जानकारी हुई है।
नजीराबाद के आरकेनगर निवासी अनुराग वर्मा को लोन दिलाने के नाम पर उन्नाव के कपिल मिश्रा और अमरदीप ने जनवरी 2026 में उनके दस्तावेज ले लिए। उनका गोविंदनगर की निजी बैंक में खाता खोला गया। अनुराग वर्मा ने फरवरी 2026 में बैंक जाकर लोन के रुपये की पूछताछ की। स्टाफ ने उन्हें बताया कि यह अकाउंट रुद्रा इंटरप्राइजेज का है। उसमें लाखों के लेनदेन हुए हैं। उन्हें साइबर अपराध की आशंका हुई जिस पर नजीराबाद और साइबर क्राइम ब्रांच को जानकारी दी। उनके खाते में 12 और फर्म से रुपये आए थे जबकि रुपये कैश में निकाले गए थे।
जांच में पार्वती इंटरप्राइजेज का नाम सामने आया। इस फर्म के खाते में 117 करोड़ का ट्रांजेक्शन मिला। खाता धारक उन्नाव के उज्ज्वल को हिरासत में लिया तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। वह बीए पास निकला। पिता के ई-रिक्शा चलाने की जानकारी हुई। उज्ज्वल ने भी लोन के लिए दस्तावेज दिए थे। पुलिस और साइबर क्राइम ब्रांच ने दोनों से जानकारी जुटाकर उन्नाव के कपिल मिश्रा और राज उर्फ अमरदीप को गिरफ्तार किया।
पूछताछ में उन्नाव के ऋषभ शुक्ला, प्रथम और कानपुर के ऋषभ पांडेय, ऋषभ पटेल, रजत और साहिल के नाम सामने आए। ऋषभ पांडेय कपिल मिश्रा की बुआ का बेटा है। वह उन्नाव की एक बाइक एजेंसी में मार्केटिंग का कार्य करता था। पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। सभी भागकर लखनऊ में छिपे हुए थे। यहां से उनके गोरखपुर जाने की सूचना मिली है। तीन अलग अलग टीमें उनको खोज रही हैं। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी से काफी तथ्य और मिलेंगे। उनकी लोकेशन लगातार ट्रेस की जा रही है।