'कैफियात एक्सप्रेस' को आजमगढ़ की लाइफ लाइन ट्रेन के नाम से जाना जाता है। इसे दिल्ली से आजमगढ़ के बीच चलाया गया था। क्या आप जानते है। इस ट्रेन का नाम कैफियत एक्सप्रेस कैसे पड़ा..? जानने के लिए पढ़िए ये खास रिपोर्ट
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कैफियत एक्सप्रेस की हादसे की रात...
डंपर से टकराकर बेपटरी हुई कैफियात एक्सप्रेस
मशहूर शायर कैफी आजमी के नाम पर आजमगढ़ से दिल्ली के लिए एक ट्रेन चलाई गई थी जिसे नाम दिया गया था 'कैफियात एक्सप्रेस' का....
इस ट्रेन का जिक्र इसलिए कर रहे हैं क्योंकि 22 अगस्त देर रात को आजमगढ़ से दिल्ली आते वक्त कानपुर और इटावा के बीच यह हादसे का शिकार हो गई। बता दें यूपी में हफ्ते भर के अंदर दो रेल हादसे हो गए हैं।
हादसा औरेया के पास अछल्दा रेलवे स्टेशन के नजदीक रात तकरीबन 2.30 बजे हुआ। ट्रेन ट्रैक किनारे पलटे एक डंपर से टकरा गई। दोनों की भिड़ंत इतनी तेज हुई कि देखते-देखते ट्रेन के इंजन समेत 10 डिब्बे बेपटरी हो गए। गनीमत रही कि किसी के मरने की खबर नहीं आई लेकिन इस हादसे में तकरीबन 82 लोग घायल हो गए। फिलहाल जानिए कैफियत एक्सप्रेस के नाम के पीछे की कहानी-
इस मशहूर शायर के नाम कैफियत एक्सप्रेस...
मशहूर शायर कैफी आजमी (फाइल फोटो)
इस ट्रेन का नाम 'कैफियत एक्सप्रेस' उर्दू के मशहूर शायर कैफी आजमी के नाम पर रखा गया। कैफी आजमी उत्तरप्रदेश के आजमगढ़ जिले के छोटे से गांव मिजवां में 14 जनवरी 1919 में जन्मे थे। आजमगढ़ से उनके इसी रिश्ते के कारण ट्रेन को आजमगढ़ से दिल्ली के बीच चलाया गया। कैफी
आजमी की बेटी और फिल्म अभिनेत्री शबाना आजमी को तो आप जानते ही होंगे...
शबाना के आग्रह पर नीतीश कुमार ने चलवाई थी ये ट्रेन
कैफी आजमी अपनी बेटी शबाना व पत्नी शौकत के साथ
उन्हीं के आग्रह पर साल 2003 में तत्कालीन रेलमंत्री नीतीश कुमार ने इस ट्रेन को चलवाया था। आजमगढ़ से पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के बीच चलने वाली ये एक्सप्रेस ट्रेन अपने 803 किलोमीटर के सफर में अयोध्या और लखनऊ से भी गुजरती है।
कैफी आजमी ने हिन्दी फिल्मों के लिए लिखे कई मशहूर गीत व गज़लें
कैफी आजमी (फाइल फोटो)
कैफी आजमी ने हिन्दी फिल्मों के लिए कई मशहूर गीत व गज़लें लिखीं, जिनमें देशभक्ति का अमर गीत – कर चले हम फिदा, जान-ओ-तन साथियों भी शामिल है।
आजमगढ़ के हर दिल में बस चुकी 'कैफियत एक्सप्रेस'
कैफियत एक्सप्रेस (फाइल फोटो)
कैफियत एक्सप्रेस आज के समय में आजमगढ़ के हर दिल में बस चुकी है। इसका नमुना उस वक्त मिल गया था जब इस ट्रेन को बंद करने की बात उठी थी।
उस दौरान कैफियात एक्सप्रेस को मऊ से चलाने की सूचना भर मिली थी और आजमगढ़ जनपद के स्वयंसेवी संगठनों में उबाल आ गया था।भारत इसके लिए वहां स्वंससेवी संगठन ने विभिन्न संगठनों के साथ मिलकर डीएम से मुलाकात की और कैफियात को आजमगढ़ से चलाने के लिए ज्ञापन सौंपा। इस एक घटना ने कैफियत एक्सप्रेस की कीमत बता दी। अब तो कैफियत एक्सप्रेस आजमगढ़ की बेशकीमती धरोहर सी हो गई है।
इलाके के लोगों का मानना है अगर इस ट्रेन को यहां से हटा दिया जाए तो काफी नुकसान पहुंचेगा। इसलिए कैफियात एक्सप्रेस लोगों की जरूरतों के साथ भावनाओं से भी जुड़ चुकी है।
कैफी आजमी के लिखे कुछ मशहूर गानें...
1.झुकी-झुकी सी नजर बेकरार है कि नहीं..
2.शीशा हो या दिल हो...
3.तुम इतना जो मुस्करा रहे हो...
4.तुझसे नाराज नहीं जिंदगी हैरान हूं मैं...
5.कर चले हम फिदा जान-ओ-तन साथियों