जरौली फेज दो में पानी की जांच करता जलकल कर्मी।
- फोटो : जलकल
कानपुर। जरौली फेज दो में दूषित पानी दे रहे हैंडपंप को उखाड़कर नई बोरिंग कराई जाएगी। शुक्रवार को अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने पानी की जांच कराई तो पता चला कि पानी पीने योग्य नहीं है।
जरौली फेज दो में डेढ़ साल से हैंडपंप से दूषित पानी आ रहा है। इसके इस्तेमाल से लोग बीमार पड़ रहे हैं। इस वजह से लोगाें ने इससे पानी लेना ही बंद कर दिया। मौजूदा समय में लोग आसपास के लोगों पर निर्भर हैं या फिर बाजार से पानी खरीद कर ला रहे हैं। तमाम शिकायतों के बाद भी अधिकारियों ने सुनवाई नहीं की। अमर उजाला ने नाै जनवरी के अंक में इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया तो जलकल के अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने हैंडपंप चलवाकर उससे पानी निकलवाया तो मटमौला पानी निकला। इसे बोतल में भरकर जांच की तो पता चला कि यह पानी पीने योग्य नहीं है। ऐसी स्थिति में क्षेत्र का कोई दूसरा व्यक्ति पानी न पिए, इसलिए हैंडपंप के ऊपर हिस्सा खोल दिया गया है। इसके अलावा एक अन्य हैंडपंप के पानी की जांच की तो पानी में बालू आ रहा था। अधिशासी अभियंता नंदकिशोर ने बताया कि जांच के दौरान एक हैंडपंप का पानी पीने योग्य नहीं मिला। इसे हटाकर दूसरी जगह बोरिंग कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि दूसरे हैंडपंप में बालू आ रही थी। उसे भी रिबोर कराया जाएगा।
चार मोहल्लों में जून से आ रहा दूषित पानी
जूही क्षेत्र के संत रविदासनगर, विनोबानगर, राखी मंडी और बुद्ध बिहार में जून से जलकल की ओर से दिया जा रहा पानी दूषित आ रहा है। इस वजह से लोग बाजार से पानी खरीद रहे या फिर आसपास लगे सबमर्सिबल पंप से पानी ले रहे हैं। इससे 20 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हैं। वहीं, विनोबानगर में जलकल नालियों की सफाई करवा रहा है, लेकिन लोगों को पानी साफ नहीं मिल पा रहा। स्थानीय अनिल कुमार, सुरेश कश्यप ने बताया कि जब से मेट्रो का काम शुरू हुआ है, तब से सीवर लाइन चोक है। इसका पानी जलकल की लाइन में जा रहा है। इस वजह से पानी की दूषित आ रहा। अधिकारियों से शिकायत के बाद भी समाधान नहीं हो पा रहा।