सपा के मुखिया मुलायम सिंह यादव और प्रदेश सरकार के प्रमुख कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव रविवार को शहर में थे।
प्रोटोकाल के अनुसार शिवपाल को शहर की सड़कों और सूखे की वजह से परेशान किसानों की समस्याओं पर समीक्षा बैठक करनी थी लेकिन अफसोस, दोनों नेताओं ने जनता की समस्याओं से जुड़े मसले पर चर्चा तक नहीं की। यहां तक कि पत्रकारों ने जब जनता की दिक्कतों से जुड़े सवाल भी करने चाहे तो आगे बढ़ गए।
शहर की सड़कें खस्ताहाल हैं, निर्माण कार्य अधूरे पड़े हैं, ट्रैफिक व्यवस्था का बुरा हाल है। यहां तक कि मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाले काम पर अधूरे पड़े हैं। किसानों को पिछले साल का मुआवजा अभी तक नहीं मिला।
इस साल भी सूखे से हालात बदतर हैं। फिर सरकार के आका यहां आए और बिना किसी का दर्द सुने वापस लौट गए। शहरवासियों को उम्मीद थी कि लोक निर्माण मंत्री शिवपाल आ रहे हैं, अब उनके शहर की सड़कें चलने लायक तो हो ही जाएगी। अधिकारी भी हाथ बांधे खड़े थे कि मंत्रीजी अब पूछेंगे-तब पूछेंगे। पर, कुछ नहीं हुआ।
सपा मुखिया अपने खासमखास आजम खान को चिंतामुक्त रहने का भरोसा देकर चले गए। शिवपाल सिंह यादव दादरी कांड पर राजनीति करते रहे।
मुआवजा अधिक तो केंद्र सरकार से वापस करा दें महामहिम ः शिवपाल
कानपुर साउथ। हाल ही में राज्यपाल राम नाईक को ओर से दादरी कांड के पीड़ितों को अधिक मुआवजा दिए जाने की बात का जवाब देते हुए कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह ने कहा कि मुआवजे के हकदार पीड़ितों को किसी जाति व संप्रदाय के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए. रही बात धनराशि की तो यदि महामहिम को लग रहा है कि वह अधिक है तो केंद्र सरकार के माध्यम से प्रदेश सरकार को वापस करा दंे, और क्या कहा जा सकता है।
पीएम मोदी पर आजम की मंदिर में घंटा बजाने की टिपप्पी पर हंसते हुए कैबिनेट मंत्री ने कहा कि यह बड़े नेताओं की बात है, इससे उन्हें दूर ही रखें तो बेहतर है। मंत्री शिवपाल के मुताबिक वह दशहरे वाले दिन यानी 22 अक्तूबर को भी कानपुर आ रहे है, फिर ठीक से बात की जाएगी।
कैबिनेट मंत्री यहां बर्रा मेहरबान सिंह पुरवा में आयोजित तिलकोत्सव में शामिल होने के लिए आए हुए थे। इस मौके पर पूर्व बेसिक शिक्षा मंत्री राम गोविंद चौधरी, पूर्व सांसद राकेश सचान, विधायक सतीश निगम, मुनींद्र शुक्ला, इरफान सोलंकी, सोम गुप्ता, महेश शुक्ला आदि मौजूद रहे।
कुछ को आशीर्वाद दिया, कुछ को आदेश
अपने सखा चौधरी हरमोहन सिंह यादव के पौत्र के तिलक समारोह में शामिल होने आए मुलायम सिंह ज्यादा देर तो नहीं रुके, लेकिन अपने 15 मिनट के समय में उन्होंने चौधरी परिवार के सभी सदस्यों से मुलाकात कर ली। किसी को आशीर्वाद दिया तो किसी का हाथ पकड़कर आदेश भी।
कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने के बाद उनका लोगोें ने स्वागत करना चाहा, लेकिन वह इतनी जल्दी में थे कि चलते ही जा रहे थे। जिस कमरे में उनके बैठने की व्यवस्था की गई थी, उधर के बजाय वह दूसरी तरफ बिना बताए ही बढ़े जा रहे थे। सुखराम पीछे-पीछे ‘अध्यक्षजी! इधर चलिए’ कहते हुए दौड़ रहे थे, लेकिन मुलायम सिंह बिना रुके बढ़े जा रहे थे।
आखिर में उनके बेटे आर्यन ने दौड़कर कहा- ‘बाबूजी उधर चलना है’ तो फिर वे लौटे। सबसे पहले उन्होंने चौधरी हरमोहन सिंह यादव के नाम पर बने इंटरकालेज का फीता काटकर शुभारंभ भी किया।
विधायक जी का साला, लड़की का मामा हूं भाई
मेहरबानसिंह का पुरवा पहुंचे शिवपाल जब बंद कमरे में पार्टी नेताओं से मुलाकात कर रहे थे, तबी झांसी और जालौन के सपा नेताओं के साथ एक व्यक्ति को सुरक्षा कर्मियों ने गेट पर रोक लिया।
जब उनसे रहा नहीं गया तो पड़े- ‘अरे भाई! मुझे जाने दो, मैं विधायक दीपनारायण जी का साला और उनकी बेटी का मामा हूं।’ तब सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें आनन-फानन भीतर भेजा। बताते चलें कि विधायक की बेटी के संग ही सुखराम के बेटे का रिश्ता हुआ है। इसी तरह नेता अमरजीत सिंह जनसेवक को भी काफी देर तक रोके रहे।
जयंती पर चौधरी हरमोहन को किया याद
चौधरी हरमोहन सिंह यादव की 94वीं जयंती पर रविवार को सपा प्रमुख मुलायम सिंह के साथ अन्य लोगों ने भी उन्हें याद किया। मौका था सुखराम सिंह के पुत्र के तिलकोत्सव का। चौधरी हरमोहन ग्राम प्रधान से लेकर राज्यसभा सांसद तक बने।