कानपुर देहात। माह-ए-रमजान का पहला रोजा बृहस्पतिवार को इबादत के साथ गुजरा। मुकद्दस महीने रमजान के पहले दिन रोजेदारों में खासा उत्साह नजर आता। बच्चों, बुजुर्ग और नौजवानों ने पांच वक्त की नमाज अदा कर, कुरान पाक की तिलावत की। रोजा इफ्तार के बाद मुल्क में अमन चैन और खुशहाली की दुआ मांगी।
मुकद्दस रमजान में इबादतों का सिलसिला शुरू हो गया है। रमजान के पहले दिन अकबरपुर, पुखरायां, भोगनीपुर, डेरापुर, मंगलपुर, रसूलाबाद, झीझक, रुरा, सिकंदरा, राजपुर, सट्टी, मूसानगर क्षेत्र की सभी मस्जिदों में मुस्लिम लोगों ने नमाज अदा की। बरकत के इस महीने में रोजेदार पूरे दिन अल्लाह की इबादत में मशगूल रहे। इधर रोजेदारों के इफ्तार के लिए बाजारों में भी खूब रौनक है। इफ्तार व सहरी के लिए लजीज व्यंजन के लिए दूध, खजूर, चिप्स समेत फलों की खूब खरीददारी हो रही है।
सिकंदरा कस्बे की खजूर वाली मस्जिद के इमाम हाफिज मुजीब रजा ने बताया कि रमजान के महीने में कुरान पाक नाजिल हुई। रमजान इबादत का महीना है। रोजे का मतलब दिन भर सिर्फ भूखे प्यासे रहना नहीं है, बल्कि बुराइयों से बचने का सबसे अच्छा मौका है। रमजान में पांच वक्त की नमाज तरावीह और कुरान की तिलावत करना जरूरी है। पहले रोजे के लिए मगरिब नमाज(शाम छह बजे) अजान होने के बाद रोजा इफ्तार कराया गया। मस्जिदों में लोग काफी संख्या में पहुंचे और रोजा इफ्तार कर नमाज पढ़ी। इसके बाद इशा नमाज के बाद मस्जिदों में तरावीह पढ़ी गई। अहमद नगर अकबरपुर की मस्जिद में रोजा इफ्तार के दौरान शमीर राईन, कासिम अली, शेखू खान, रजी खांन, समीर मंसूरी, अजीज आदि लोग मौजूद रहे।
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रमजान का पहला जुमा आज, मस्जिदों में हुई तैयारी
रमजान के पहले जुमा (शुक्रवार) के चलते आज मस्जिदों में न केवल विशेष नमाज होगी, बल्कि इबादत का दौर और दिनों से ज्यादा नजर आएगा। लिहाजा मस्जिदों में इंतजाम पहले से मुकम्मल किए गए हैं। मस्जिदों में भीड़ अधिक पहुंचने की संभावना के चलते पुलिस प्रशासन भी अलर्ट है।
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रमजान के है तीन अशरे
रमजान के महीने को दस-दस दिन के तीन अशरों (भागों) में बांटा गया है। पहले दस दिन रहमत का अशरा होता है। दूसरे 10 दिन मगफिरत यानि गुनाहों से माफी और तीसरा अशरा जहन्नुम से बचाने का होता है। अकबरपुर के अहमद नगर गौसिया मस्जिद के हाफिज मोहम्मद अकरम रजा ने बताया कि रमजान का हर दिन बड़ा ही कीमती होता है। रमजान का चांद दिखते ही शैतान को कैद कर दिया जाता है। इस पाक महीन में सवाब का दर्जा सत्तर गुना अधिक हो जाता है। यानी की हर नेक काम करने पर सत्तर का सवाब मिलता है।