कानपुर। डिजिटल अरेस्ट के 69 दिन याद कर सेवानिवृत्त इंजीनियर सिहर उठते हैं। बताया कि पहली बार कॉल आने से लेकर ठगी का अहसास होने तक उन्होंने और पत्नी ने बहुत कुछ सहा है। उन दिनों करीब 24 घंटे वीडियो कॉल चालू रहती थी। किसी वजह से फोन कट जाए तो कुछ देर में ही फिर फोन आ जाता था। कॉल क्यूं काटी, जांच में सहयोग क्यों नहीं कर रहे, लगता है मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल हो, ऐसे चुभने वाले शब्द बोलते और फिर फोन न काटने की हिदायत देते। इतना दबाव बना दिया था कि डायलिसिस भी कराने जाओ तो वीडियो कॉल की निगरानी में रहना पड़ता था। अगर फोन कट जाए तो कहते थे फोटो भेजो तब मानेंगे डायलिसिस करा रहे हो।
इस दौरान बेटे और अन्य रिश्तेदारों की कॉल आईं। मन में आया कि एक बार उन्हें सारी जानकारी दे दें लेकिन शातिरों ने इस तरह से जाल में फंसा रखा था कि इसकी हिम्मत नहीं जुटा सका। अंदर ही अंदर घुटते रहे। उनके दुख में पत्नी ने हिम्मत दिलाई। हर पल ख्याल रखा। साइबर अपराधी वीडियो कॉल और सामान्य कॉल से धमकाते, डराते और फटकारा करते थे। कई बार अपशब्द भी कहे।
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सीबीआई कार्यालय और कोर्ट का सेटअप दिखा डराया
पीड़ित के मुताबिक आरोपियों ने उन्हें दबाव में लेने के लिए पूरी तैयारी कर रखी थी। उन्होंने वीडियो कॉल की तो उसमें सीबीआई कार्यालय और कोर्ट का सेटअप दिखाकर जांच के भ्रम में रखा। यही वजह थी उनकी साजिश से बाहर नहीं निकल सके। उसके साथ कई लोग शामिल थे, जो बकायदा एक दूसरे से कार्यालय के अन्य किरदारों को निभा रहे थे। वीडियो कॉलिंग में उन लोगों ने सरकारी अलमारी, मेज और फाइलें तक दिखाई हुई थी।