किशोरी को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने वाले को विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट डॉ. कपिला राघव ने तीन साल कैद व पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। कोर्ट ने माना कि भले ही पीड़िता ने अभियुक्त से विवाह कर लिया हो, दोनों साथ रह रहे हों और उनके बच्चे भी हों लेकिन अभियुक्त ने किशोरी के मामा की मर्जी के बगैर उसे भगाकर विवाह किया, इसलिए वह अपहरण का दोषी है।
मामा-मामी के घर रह रही नाबालिग को 2 जून 2015 को सचेंडी सीढ़ी निवासी सोनू भगा ले गया था। नाबालिग अपने साथ 30 हजार रुपये व जेवरात भी ले गई थी। मामा ने 10 जून को सोनू व उसके साथी महाराजपुर नारायणपुर निवासी छोटेलाल उर्फ अवधेश कुमार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
विशेष लोक अभियोजक गंगा प्रसाद यादव ने बताया कि कोर्ट में पीड़िता बयान से मुकर गई। उसने अपनी मर्जी से साथ जाने, मर्जी से विवाह करने के साथ ही दुष्कर्म से इनकार किया था। कोर्ट ने पति सोनू को दुष्कर्म के आरोप से तो मुक्त कर दिया लेकिन अपहरण का दोषी मानते हुए सजा सुनाई। वहीं छोटेलाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
कोर्ट की टिप्पणी
पीड़िता ही दुष्कर्म की साक्षी होती है। अगर वह कहती है कि अभियुक्त ने उसके साथ दुष्कर्म नहीं किया तो किसी और साक्ष्य से दुष्कर्म साबित नहीं किया जा सकता। इसलिए सोनू दुष्कर्म का दोषी नहीं है लेकिन सोलह साल की किशोरी को उसके संरक्षक की सहमति के बिना विवाह और संभोग के लिए भगा ले जाना गंभीर अपराध है। विवाह और गर्भवती होने के समय पीड़िता की उम्र 18 वर्ष से कम थी। वह विवाह के लिए सहमति देने में सक्षम नहीं थी, इसलिए सोनू अपहरण का दोषी है।