कानपुर। कलक्ट्रेट परिसर में शुक्रवार को सोंठ, अलसी, मिलेट्स के लड्डुओ की सुगंध से महक उठा। अवसर था ‘लड्डू बाज़ार उत्सव’ का, जिसका शुभारंभ जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने किया। शहर की महिलाओं के बने लड्डू विदेश में भी स्वाद बढ़ा रहे हैं। इसे अमर उजाला ने प्रकाशित किया तो डीएम ने मंच प्रदानकर उत्सव बाजार लगा दिया।
लड्डू बाजार में शहर की महिला ने स्टाल लगाए थे। उत्सव में सोंठ, अलसी–मेथी, कच्ची हल्दी के लड्डू, शुगर-फ्री गजक, और मिलेट्स आधारित स्नैक्स ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। साकेतनगर की चिंकी अग्रवाल ने बताया कि वह चार साल से बेसन, तिल, बाजरा, अलसी और सोंठ के लड्डू बना रही हैं।
मंधना स्थित माधव फूड इंडस्ट्रीज के प्रतिनिधि हेमंत तिवारी ने बताया कि उनका स्टार्टअप कच्ची हल्दी और मिलेट्स आधारित लड्डू के साथ बिना गुड़–चीनी के तिल के लड्डू भी तैयार करता है। डॉ. ज्योति चौहान ने बताया कि एमएसएमई प्रशिक्षण के बाद वे ज्वार, बाजरा, रागी और अलसी से बने उत्पादों का निर्माण कर रही हैं। इसमें रागी नमकीन और अलसी का बुकनू विशेष लोकप्रिय है।
चौबेपुर के बिरैचामऊ क्षेत्र की अन्नपूर्णा महिला स्वयं सहायता समूह ने भी अपने प्राकृतिक एवं जैविक उत्पाद प्रदर्शित किए। राष्ट्रीय आजीविका मिशन से जुड़े इस समूह ने 2019 में मानस ग्राम ब्रांड शुरू किया था। इसके तहत दालें, तिलहन, अचार, मुरब्बा, दलिया, अनाज, मसाले और कई जैविक उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इनकी मांग शहर के अलग-अलग स्थानों से होती है।
जिलाधिकारी ने कहा कि भारत की असली, स्वास्थ्यवर्धक और समय–परीक्षित रेसीपी बड़े होटलों की रसोई नहीं बल्कि घरों की पारंपरिक गृहिणियों ने तैयार की हैं। जिले की कई महिलाएं छोटे स्तर पर ऐसे घरेलू उद्योग चला रही हैं, जो शुद्ध, ताजा और शरीर को पोषण देने वाले खाद्य उत्पाद बना रही हैं। ऐसे आयोजन न केवल उनके प्रयासों को पहचान देते हैं बल्कि उन्हें स्थायी बाजार का अवसर भी प्रदान करते हैं।