कानपुर। कलक्ट्रेट का बाबू जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्रबंधन की अनुमति के बगैर कॉलेज कैंपस के क्वार्टर का आवंटन कर दे रहा है। डीएम ऑफिस से अब तक 50 फीसदी कोटे से अधिक आवास आवंटित हो चुके हैं। प्रबंधन के अधिकारियों का कहना है कि डॉक्टरों के रहने की जगह नहीं है और बाहरी लोगों को आवास आवंटित किए जा रहे हैं। कैंपस असुरक्षित हो गया और चोरी की घटनाएं बढ़ गई हैं। मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से इस प्रकरण की शिकायत की गई है।
पूल हाउसिंग स्कीम के तहत वर्ष 1975 में पीडब्ल्यूडी ने कॉलेज परिसर में आवास बनाए थे। प्रबंधन के अधिकारियों का कहना है कि शासनादेश में बदलाव हो गया, फिर भी कलक्ट्रेट से क्वार्टर आवंटित किए जा रहे हैं। इनमें रहने वाले बिना बिल दिए चले जाते हैं जो कॉलेज के बकाये में जुड़ता है। इनका 30 लाख से अधिक बिल बकाया है। स्कीम में डीएम ऑफिस को 50 फीसदी का कोटा दिया गया था। अब कोटे से अधिक आवास आवंटित कर दिए गए। आवंटन के पहले कॉलेज प्रबंधन के अधिकारियों से अनुमति भी नहीं ली जाती।
कैंपस प्रभारी डॉ. संतोष बर्मन के मुताबिक टाइप-1 और 2 में 54 में से 28 आवास आवंटित कर दिए गए। टाइप-3 में आठ में छह आवास डीएम ऑफिस से आवंटित किए गए हैं। एक बंगला एसीपी को आवंटित किया गया। गेट खुला रहने से बाहरी लोग आते-जाते रहते हैं। जिन्हें क्वार्टर आवंटित किए जाते हैं, वे बिजली और पानी का बिल भी नहीं देते। यह कॉलेज के खाते में आता है। कैंपस से एक कार, छात्रावासों से लैपटॉप और दूसरा सामान चोरी हो रहा रहा है।
प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि इस संबंध में मुख्यमंत्री और प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा से शिकायत की गई है। डीएम को भी पत्र भेजा गया है। इस संबंध में एक याचिका डॉ. अरविंद बनाम जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज हाईकोर्ट में भी दाखिल की गई है। क्वार्टर आवंटन की वजह से रेजीडेंट डॉक्टरों को रहने में दिक्कत हो रही है।