कानपुर। कभी औद्योगिक नगरी के रूप में पहचाने जाने वाला कानपुर अब धार्मिक और पर्यटन हब के रूप में नई पहचान बना रहा है। सरकारी योजनाओं और करोड़ों रुपये के विकास कार्यों ने शहर के पौराणिक स्थलों को नया रूप दिया है। वित्तीय वर्ष 2025 में 66.98 लाख से अधिक पर्यटक कानपुर आए, जो तीन साल पहले की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा है।बिठूर क्षेत्र अब विकसित पर्यटन केंद्र बन चुका है। करीब 75 लाख रुपये से घाटों का सुदृढ़ीकरण, आरसीसी रैंप, फ्लोरिंग और भव्य म्यूरल आर्ट तैयार किया गया है। मेस्कर घाट में 93.24 लाख रुपये से शेल्टर, चेंजिंग रूम, सैंड स्टोन फ्लोरिंग और भव्य स्वागत द्वार बनाए गए हैं। पनकी हनुमान मंदिर के बाहरी सुंदरीकरण के लिए 184 लाख रुपये स्वीकृत हो चुके हैं। जिले के अन्य मंदिरों में यात्री हॉल, शौचालय, सोलर लाइट, इंटरलॉकिंग और हरित विकास कार्य भी पूरे किए गए हैं।
बिल्हौर के खेरेश्वर शिव मंदिर में 134.69 लाख रुपये की लागत से यात्री सुविधाएं विकसित की गई हैं। इसके अलावा उजियारी देवी मंदिर में 115.98 लाख, राम-सीता मंदिर अकबरपुर में 44.49 लाख, कुड़नी हनुमान मंदिर में 95.77 लाख, कुष्मांडा देवी मंदिर घाटमपुर में 90.63 लाख और भद्रकाली मंदिर में 98.65 लाख से सुंदरीकरण कार्य हुए हैं। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि बिठूर, घाटमपुर और बिल्हौर को जोड़कर एक धार्मिक-पर्यटन सर्किट विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य कानपुर को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करना और स्थानीय रोजगार बढ़ाना है। कानपुर तेजी से उत्तर प्रदेश का प्रमुख पर्यटन हब बन रहा है।
2023 में 28.19 लाख भारतीय और 3,756 विदेशी पर्यटक आए थे। वहीं 2024 में 42.64 लाख भारतीय और 4,334 विदेशी पर्यटक तथा 2025 में 66.98 लाख भारतीय और 3,931 विदेशी पर्यटक पहुंचे।