रनियां। ईरान, अमेरिका और इस्राइल के बीच हुए सीज फायर के बावजूद स्थानीय उद्योगों की स्थिति में फिलहाल कोई सुधार होता नहीं दिख रहा है। उद्यमियों का कहना है कि कच्चे माल की भारी कमी और बाजार में सुस्ती के चलते उत्पादन प्रभावित है। अभी भी उद्योग पर संकट बरकरार है।
रनियां-जैनपुर औद्योगिक क्षेत्र में खासतौर पर प्लास्टिक और पैकेजिंग उद्योगों पर खाड़ी क्षेत्र में चले युद्ध का गहरा असर पड़ा है। क्रूड ऑयल की आपूर्ति बाधित होने से प्लास्टिक का दाना बनना मुश्किल हो गया है, जिससे प्लास्टिक उत्पादों का निर्माण लगभग ठप पड़ गया है। उद्यमियों के अनुसार बाजारों में अभी भी सन्नाटा है और नए ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं। लागत बढ़ने के बावजूद व्यापारी बढ़े हुए दामों पर माल खरीदने को तैयार नहीं हैं।
ऐसे में छोटे उद्योग सबसे ज्यादा संकट में आ गए हैं, जबकि बड़े उद्योग पुराने स्टॉक के सहारे किसी तरह काम चला रहे हैं। युद्ध के चलते जिले में उद्योग को करीब 300 करोड़ से अधिक का झटका लग चुका है। इससे कई उद्यमियों ने अपने प्लांट तक बंद कर दिए थे।
उद्यमियों का मानना है कि केवल 15 दिनों के सीज फायर से हालात में कोई खास बदलाव नहीं आएगा। जब तक खाड़ी क्षेत्र में पूरी तरह स्थायी शांति स्थापित नहीं होती, तब तक उद्योगों का सामान्य संचालन संभव नहीं है। वर्तमान में अधिकांश उद्यमी वेट एंड वॉच की स्थिति में हैं। उद्योग जगत के जानकारों का कहना है कि हालात सामान्य होने में कम से कम छह माह का समय लग सकता है, इसके बाद ही उद्योग अपने पुराने स्तर पर लौट पाएंगे।
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बिना काम मजदूरों को दे रहे वेतन
सीज फायर से उद्योगों में कोई खास बदलाव नहीं आएगा। 41 दिनों में हालात काफी खराब हो चुके हैं। मजदूरों को बिना काम के वेतन देना पड़ रहा है। युद्ध की स्थिति अभी भी अनिश्चित है, ऐसे में आगे की रणनीति पर विचार किया जा रहा है। - मनोज बंका, उद्यमी
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युद्ध के बाद फैक्टरी बंद करनी पड़ी थी। अब सीमित मजदूरों के साथ दोबारा संचालन शुरू करने की तैयारी है। सीज फायर का कोई खास असर नहीं पड़ेगा। पूरी तरह हालात सामान्य होने में करीब छह माह लगेंगे। - आशीष पांडेय, उद्यमी