आईएएस परीक्षा में पांचवीं रैंक पाने वाले शंशाक त्रिपाठी ने पनकी आवास विकास 3 स्थित घर आने के बाद अपनी भाभी के हाथों से मिठाई खाई। साथ में मां, छोटा भाई व मित्र।
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देश में पांचवीं रैंक पाकर आईएएस बने शहर के होनहार शशांक त्रिपाठी ट्रैफिक अराजकता, अतिक्रमण और जाम को पब्लिक की सबसे बड़ी समस्या मानते हैं। उनका कहना है कि अफसर बनकर इस समस्या के लिए कुछ न कुछ जरूर करूंगा।
शनिवार को आवास विकास स्थित अपने घर पहुंचे शशांक ने ‘अमर उजाला’ से हुई विशेष बातचीत में कहा कि सिर्फ अफसर बनना मेरा लक्ष्य नहीं है, मैं आईएएस बन कर आम आदमी की उम्मीदों को पूरा करना चाहता हूं। मूलरूप से रसूलाबाद के गांव अटिया रायपुर निवासी शशांक का परिवार यहां आवास विकास में रहता है।
पुणे में आईआरएस की ट्रेनिंग से घर लौटे शशांक ने बताया कि उन्होंने यूपी कैडर के लिए पहली च्वाइस भरी है। जब ज्वाइन करने का मौका मिलेगा, वे ट्रैफिक और जाम के लिए प्लान जरूर बनाएंगे।
बहुत तंगी देखी है
शशांक ने बताया कि बचपन से परिवार में बहुत तंगी देखी है। जुगल देवी सरस्वती विद्यालय में बड़े बाबू पिता श्रीनारायण त्रिपाठी और मां सुमन ने अभाव झेल बच्चे बड़े किए हैं। पिता, बडे़ भाई मयंक (नारकोटिक्स मुंबई में इंस्पेक्टर) ने इच्छाएं पूरी कीं। अब वे छोटे भाई ऋषभ के साथ माता-पिता और बड़े भाई के सपने पूरे करेंगे।
सुना है अधिकारी काम नहीं करते
शशांक ने बताया कि उन्होंने लोगों को अक्सर यह कहते सुना है कि ऊपर बैठे अधिकारी काम नहीं करते, इसलिए नीचे वाले अफसर भी नहीं सुनते। लोग कहते हैं कि अधिकारी चाह लें तो शहर की व्यवस्था सुधर जाए। शशांक ने कहा कि वे जहां भी रहेंगे, लोगों के इस भ्रम को तोड़ कर काम करेंगे।