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Kanpur News: गुजरात में कपड़ा मिलें बंद, 30 प्रतिशत तक बढ़े दाम

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कानपुर। अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच युद्ध में भले ही कुछ नरमी दिख रही हो लेकिन आम लोगों की समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। कच्चे माल के संकट के चलते गुजरात में एक हजार कपड़ा मिलों में उत्पादन ठप हो गया है। इससे सहालगी कपड़ों का संकट शुरू हो गया है। कपड़ों के दाम भी 30 प्रतिशत बढ़ गए हैं। नए ऑर्डर भी बुक नहीं किए जा रहे हैं।
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वहीं, सीमेंट कंपनियां भी फिर से दाम बढ़ाने की तैयारी में हैं। पूर्व में प्रति बोरी 10-20 रुपये की बढ़ोतरी करने के बाद अब 60-100 रुपये प्रति बोरी दाम बढ़ाने के संदेश सीमेंट डीलरों को भेजे जा रहे हैं। रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम पहले से ही बढ़े हुए हैं। इसके अलावा किराना आइटमों के दाम भी बढ़ गए हैं। कपूर, जावित्री, तरबूज का बीज, सूखी धनिया, केसर, छआरा, खजूर के दाम भी तेज हो गए हैं।
शहर के जनरलगंज, नौघड़ा, काहूकोठी में थोक कपड़ों का बड़ा बाजार है। गुजरात के सूरत, अहमदाबाद से सबसे ज्यादा कपड़ा शहर में आता है। अप्रैल से सहालग शुरू होगी। इस बार गर्मी के सहालग का लंबा सीजन है। अप्रैल, मई और जून में शहर में बड़े स्तर पर शादियां होनी हैं। इसके चलते कारोबारियों ने होली के पहले से कपड़ों का स्टाॅक करना भी शुरू किया था लेकिन युद्ध के चलते हालात बिगड़ गए। कपड़ा तैयार होने में अलग-अलग यार्न, फाइबर और रसायनों का इस्तेमाल होता है। युद्ध के चलते कच्चे माल पर संकट आ गया है। इसके चलते गुजरात की एक हजार मिलों में काम बंद हो गया है। वहीं, एफएमसीजी कंपनियां कच्चा माल और पैकेजिंग उत्पादों के दामों में बढ़ोतरी का हवाला देकर हर दिन दाम बढ़ा रही हैं। चिप्स, नमकीन बनाने वाली कंपनियों ने उत्पाद का भार कम कर दिया है।
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नयागंज मर्चेंट एसोसिएशन के महामंत्री रोशन लाल अरोड़ा ने बताया कि एफएमसीजी कंपनियां माल रोक रहीं हैं और डीलरों को आपूर्ति नहीं की जा रही है। प्लास्टिक दाना महंगा होने से पैकिंग आइटम के दामों में स्थिरता ही नहीं रह गई है। टूथ पाउडर, सेविंग रेजर, सेविंग ब्लेड, टंग क्लीनर, पैक्ड फूड आइटम के दाम बढ़ाए गए हैं। कुछ कंपनियों ने पैकेट का भार कम कर दिया है। किचन मसाला और मेवा के दाम भी बढ़ गए हैं। कपूर के दाम 650 रुपये किलो से बढ़कर 850 रुपये, जीरा 1000 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 1100 रुपये किलो हो गया है। ईरानी पिस्ता भी 1100 रुपये किलो हो गया है। पहले इसके दाम 1000 रुपये किलो थे। जावित्री का भाव 2000 रुपये किलो से बढ़कर 2200 रुपये किलो हो गया है। सूखी धनिया के दाम 100 रुपये किलो से बढ़कर 150 रुपये हो गए हैं। एक ग्राम केसर का दाम 200 रुपये से बढ़कर 250 रुपये प्रति एक ग्राम हो गया है। छुआरा का भाव 250 रुपये किलो से बढ़कर 300 रुपये और खजूर का भाव 250 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 320 रुपये हो गया है।
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (फियो) के संयोजक आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि उत्पादों की लॉजिस्टिक कास्ट बढ़ने से कानपुर में आयातित होने वाले उत्पाद व वस्तुओं के दाम बढ़ गए हैं। कच्चे माल की कमी और कीमतों में वृद्धि का सीधा असर प्लास्टिक उद्योग पर पड़ा। इसके चलते पैकेजिंग सामग्री महंगी हो गई है। निर्यातकों-आयातकों को दो हजार करोड़ का झटका लग चुका है। घरेलू उद्योगों में 30-40 प्रतिशत उत्पादन घट गया है। चमड़ा, केमिकल, प्लास्टिक, कपड़ा उद्योग पर सबसे ज्यादा प्रभाव है। तमाम इकाइयों में एक शिफ्ट में ही काम हो रहा है। रोजगार का संकट भी सामने आ गया है।
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बातचीत
कारोबार 40 प्रतिशत ही रह गया
गुजरात में एक हजार के करीब कपड़ा मिलों में उत्पादन बंद हो गया है। इसके चलते सहालगी उत्पादों जैसे साड़ी, लहंगा के उत्पादों की कमी हो गई है। इनके दाम भी 30 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। अप्रैल से सहालग शुरू हो रही है। कारोबार 40 प्रतिशत ही रह गया है। - रुमित सिंह सागरी, निदेशक, कानपुर कपड़ा कमेटी।
100 रुपये बोरी महंगी हो सकती सीमेंट

सीमेंट कंपनियों ने पूर्व में प्रति सीमेंट की बोरी में 10-20 रुपये की तेजी कर दी थी। अब कंपनियां 60-100 रुपये प्रति बोरी सीमेंट के दाम बढ़ाने के लिए डीलरों को संदेश भेज रही हैं। बाजार में 240-400 रुपये कीमत की सीमेंट की बोरियां मिलती हैं। - नवीन डरोलिया, प्रांतीय महामंत्री, उत्तर प्रदेश सीमेंट डीलर एसोसिएशन।
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