कानपुर। जाजमऊ के रहने वाले मोहम्मद इसरार को अपने छोटे भाई से मिलने दुबई जाना था। गुरुवार को दिल्ली से फ्लाइट थी, लिहाजा वह प्रीमियम ट्रेन 82501 लखनऊ-नई दिल्ली तेजस एक्सप्रेस से निकले। यह ट्रेन दस घंटे लेट हो गई और गुरुवार दोपहर 12:35 की जगह रात करीब दस बजे दिल्ली पहुंची। उनकी दिल्ली से फ्लाइट 04:15 बजे थी जो उड़ान भर चुकी थी। ऐसे में वह वह दुबई नहीं जा सके।
कोहरे में ट्रेनों की लेटलतीफी से लोगों का शेड्यूल बिगड़ गया है। जरूरी काम से घर से निकलने वाले लोग समय पर अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। शुक्रवार को भी 67 ट्रेनें देरी से कानपुर सेंट्रल स्टेशन आईं। 02563 बरौनी-नई दिल्ली स्पेशल 27 घंटे, 02570 नई दिल्ली-दरभंगा स्पेशल सात, 15707 चंपारण हमसफर 13 घंटे, 15557 दरभंगा आनंद विहार स्पेशल सात, 12452 दिल्ली-कानपुर केंद्रीय श्रम शक्ति एक्सप्रेस पांच घंटे देरी से कानपुर सेंट्रल स्टेशन आई।
एक्स पर जताई नाराजगी
लेट होने वाली ट्रेनों में फंसे यात्रियों ने सोशल नेटवर्किंग साइड एक्स पर पोस्ट कर नाराजगी जताई। प्रियंका पटेल ने लिखा कि 22415 वंदे भारत डेढ़ घंटा लेट है। मुझे दिल्ली से फ्लाइट पकड़ना है जो अब संभव नहीं हो सकेगा। नागेंद्र कुमार ने पोस्ट किया कि नई दिल्ली से जयनगर जाने वाली 12562 स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एक्सप्रेस 12 घंटे में पहुंचाती है जो अब 20 घंटा लेट है।
राजधानी एक्सप्रेस में भरे हैं काकरोच
सौरव मिश्रा ने लिखा कि राजधानी एक्सप्रेस एक तो लेट है, ऊपर से कोच में काकरोच भरे पड़े हैं। आदित्य आर्यन ने बताया कि 12310 राजधानी एक्सप्रेस के शौचालय की छत से पानी टपक रहा है। यात्रियों को भोजन भी समय पर सर्व नहीं किया गया।
बातचीत
बेटी की परीक्षा दिलाने महाराजपुर के हाथीगांव गए थे। अब चित्रकूट मेमू से वापसी करनी है जो तीन घंटा लेट है, इसलिए ठंड में स्टेशन पर ही बैठना पड़ा। -हसीन खान, मर्दनपर, बांदा
तीन दिन के लिए कानपुर आए थे। अब 12511 त्रिवेंद्रमपुरम एक्सप्रेस से वापस जाना है जो ढाई घंटा लेट है। होटल भी छोड़ दिया, इसलिए स्टेशन पर इंतजार करना पड़ रहा है। -प्रभास, भोपाल
दोस्त के साथ विजयवाड़ा घूमने जाना है। ट्रेन नंबर-12511 में टिकट है जो डेढ़ बजे जाती है, इसलिए जल्दी घर से निकल आए। यहां आए तो पता चला कि करीब चार घंटा लेट है।
-सागर सिंह, मैथा, कानपुर देहात
कोलकाता में हॉकी का टूर्नामेंट खेलकर लौटे हैं। पटना-कोटा एक्सप्रेस से वापस घर जाना है जो करीब साढ़े तीन घंटा लेट है। ठंड में रेलवे स्टेशन पर ही बैठना पड़ा।
-मनीषा, झांसी