कानपुर देहात। जिले में डेंगू व बुखार लगातार कहर बरपा रहा है। इंजुवारामपुर गांव में डेंगू की चपेट में आकर रविवार की देर रात एक किशोर की मौत हो गई। सूचना पर गांव पहुंची स्वास्थ्य टीम ने तीन लोगों के रक्त का सैंपल लिया।
वहीं, बुखार पीड़ित अन्य लोगों का उपचार कर दवा दी गई। उधर, झींझक में बुखार से एक महिला की मौत हो गई। जिले में डेंगू व बुखार से अब तक 71 लोग दम तोड़ चुके हैं।
डेरापुर विकासखंड क्षेत्र के इंजुवारामपुर गांव निवासी महेंद्र सविता के बेटे भोला सविता (14) को 19 अक्तूबर को बुखार आया। परिजन उसे उपचार के लिए रूरा के एक निजी अस्पताल ले गए।
जहां डॉक्टर ने टायफाइड बताकर उपचार शुरू कर दिया। बाद में हालत बिगड़ने पर उसकी किट से जांच कराई तो रिपोर्ट डेंगू पॉजिटिव आई। जिस पर परिजन किशोर को उपचार के लिए कानपुर के एक निजी अस्पताल ले गए।
रविवार देर रात भोला की मौत हो गई। सोमवार को किशोर का शव गांव पहुंचा तो परिजन रोने बिलखने लगे। बाद में किशोर का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
वहीं इंजुवारामपुर में किशोर की डेंगू से मौत की जानकारी मिलने पर चिकित्साधीक्षक डॉॅ. अशोक कुमार टीम के साथ गांव पहुंचे। उन्होंने बताया कि गांव में दस रोगियों का परीक्षण किया गया। बुखार के तीन मरीजों के रक्त का नमूना लेकर दवा दी गई है।
बताया कि किशोर के डेंगू पॉजीटिव होने के साथ साथ सेप्टिक शाक (शरीर में पस पड़ने) से पीड़ित होने की जानकारी मिली है। इसी तरह झींझक कस्बे के रानी लक्ष्मीबाई नगर निवासी सोनी (25) पत्नी अनुज वर्मा को पिछले चार दिन से बुखार आ रहा था।
परिजन उपचार के लिए कानपुर के अस्पताल ले गए। वहां सोमवार को सोनी की मौत हो गई। परिजन शव लेकर घर आ गए। पति ने बताया कि सोनी को बुखार आ आ रहा था। सीएचसी अधीक्षक डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य टीम भेजकर परिजनों का परीक्षण कराया जाएगा।
जिला अस्पताल की ओपीडी में आए 775 मरीज
जिले में बढ़ते डेंगू व बुखार के मरीजों के चलते हर रोज जिला अस्पताल अकबरपुर में भीड़ उमड़ रही है। सोमवार को ओपीडी में डॉक्टर को दिखाने के लिए 775 मरीजों ने पर्चा बनवाया। नौ में से आठ ओपीडी में डॉक्टर बैठे।