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अथर्टन मिल में ही बनेगा टेक्नोलॉजी सेंटर

Wed, 29 Jun 2016 12:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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जरीब चौकी पर जेके जूट मिल के बगल में स्थित अथर्टन मिल। - फोटो : amarujala
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कानपुर। औद्योगिक शहर के लोगों के लिए एक और खुशखबरी। उद्योगों की जरूरत के मुताबिक लोगों को हुनरमंद बनाने के लिए शहर में प्रस्तावित टेक्नोलॉजी सेंटर (टूल रूम) के लिए जमीन मिल गई है। इसका निर्माण जरीब चौकी के पास स्थित अथर्टन मिल में ही होगा।
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मंगलवार को कपड़ा मंत्रालय ने एमएसएमई विभाग को जमीन देने के लिए सैद्धांतिक सहमति दे दी। चार जुलाई को इसका शिलान्यास कपड़ा मंत्री संतोष गंगवार और लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) मंत्री कलराज मिश्र, सांसद मुरली मनोहर जोशी, राज्यमंत्री गिरिराज करेंगे।
एमएसएमई विकास संस्थान के निदेशक उमेश चंद्र शुक्ल ने मंगलवार को अमर उजाला में टेक्नोलॉजी सेंटर के संबंध में पूर्व में प्रकाशित खबरों पर मुहर लगा दी। उन्होंने बताया कि दोनों मंत्रालयों के अधिकारियों की मीटिंगों के बाद अथर्टन मिल को टेक्नोलॉजी सेंटर के लिए उपयुक्त माना गया है। कपड़ा मंत्रालय ने इस जमीन को एमएसएमई को सुपुर्द करने का भी फैसला ले लिया है। अब आगे की गतिविधियां बढ़ाने के लिए मीटिंगों का दौर जारी है। समय समय पर इसमें डेवलपमेंट होते रहेंगे। दोनों मंत्रालयों की ओर से शिलान्यास चार जुलाई प्रस्तावित है। एमएसएमई विभाग के अधिकारी इसी दिन शिलान्यास की तैयारी कर रहे हैं।
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1.6 एकड़ मिली जमीन
फिलहाल टेक्नोलॉजी सेंटर के लिए अथर्टन मिल की 1.6 एकड़ जमीन एमएसएमई विभाग को मिली है। मिल का कुछ हिस्सा विवादित होने की वजह से छोड़ दिया गया है। हालांकि इसे भी टेक्नोलॉजी सेंटर को देने के लिए काम चल रहा है।
तेज होंगी गतिविधियां
चार जुलाई तक शहर में कपड़ा और एमएसएमई मंत्रालय के अधिकारियों का आना जाना लगा रहेगा। शिलान्यास से पूर्व मीटिंगें भी होंगी। एमएसएमई विकास संस्थान में अधिकारियों को टेक्नोलॉजी सेंटर के लिए जमीन फाइनल होने की
सूचना मिलते ही कामकाज में तेजी आ गई। एक दो दिन में अथर्टन मिल की सफाई का काम शुरू हो जाएगा।
इसलिए मिली   अथर्टन मिल
नेशनल टेक्सटाइल कारपोरेशन की शहर में पांच मिलों में से अथर्टन की जमीन फ्रीहोल्ड है। इस वजह से इसका भू उपयोग आसानी से बदला जा सकेगा। जिस जमीन पर टेक्नोलॉजी सेंटर बनेगा, उसका किराया लघु सूक्ष्म एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) विभाग को देना होगा। यह किराया सर्किल रेट के हिसाब से लीज के वर्षों के आधार पर वसूला जाएगा। इसके अलावा एमएसएमई विभाग को भी यह जमीन पसंद आ रही है।
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