संगीत और सामाजिक विज्ञान की टीचर साइंस और गणित पढ़ा रही हैं। यह अंधेरगर्दी कहीं और नहीं बल्कि मंडल मुख्यालय के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में है। करीब डेढ़ साल से विद्यालय की यही हालात है।
बांदा जिले में आठों ब्लाकों में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय हैं। इनमें गरीब छात्राओं को मुफ्त पढ़ाई, रहना, खाना और उपचार आदि की व्यवस्था है। शासन बालिकाओं की शिक्षा पर पैसा तो बहा रहा है, लेकिन इन स्कूलों की सुध नहीं ली जा रही। कमासिन ब्लाक में कस्तूरबा गांधी विद्यालय का भवन तैयार न होने से इस विद्यालय को मुख्यालय स्थित डायट परिसर में चलाया जा रहा है।
कक्षा छह से आठ तक की 100 बालिकाएं अध्ययनरत हैं। गणित, विज्ञान, संगीत, हिंदी, अंग्रेजी, कला, सामाजिक विषय पढ़ाने के लिए वार्डेन समेत 10 टीचरों के पद हैं। चार फुल टाइम टीचर और चार पार्ट टाइम टीचर की तैनाती होनी चाहिए। यहां डेढ़ साल से न तो वार्डेन है और न ही गणित और साइंस विषय की टीचर हैं।
फुल टाइम टीचर कविता सिंह प्रभारी वार्डेन हैं। अंजू वर्मा कला की टीचर हैं। अंजू ने बताया कि गणित व साइंस का टीचर डेढ़ साल से नहीं है। वह अक्सर विज्ञान व गणित की क्लास ले लेती हैं। उधर, छात्राओं ने बताया कि विज्ञान व गणित की टीचर न होने से इन विषयों की नियमित पढ़ाई नहीं हो पा रही। ट्यूशन भी नहीं है। ऐसे में वे इन विषयों में शून्य हैं।