मामले में पहले नारायण सिंह को अग्रिम जमानत मिल गई थी। 26 जुलाई को सुनवाई के दौरान जमानत खारिज कर दी गई थी। तब उसे जेल भेजा गया था। जेल सूत्रों के मुताबिक जेल में नारायण ने सांठगांठ कर ली। कुछ बड़े नेताओं ने उसकी पैरवी की, जिसके बाद तबीयत खराब होने के नाम पर वह जेल अस्पताल में भर्ती हो गया। यहां पर उसको हर एक सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं।
कई सत्ताधारी करीबी मदद में जुटे
पूर्व जेल मंत्री नारायण से जब मिलने पहुंचे थे, तो उनके साथ एक दर्जन से अधिक लोग थे। काफी देर तक उन्होंने नारायण से मुलाकात कर बातचीत की। सूत्रों के मुताबिक पूरा प्रोटोकॉल उनको दिया गया। इसके अलावा कई सत्ताधारी भी नारायण के करीबी हैं, जो हर संभव मदद के प्रयास में जुटे हैं।
दो दिन में त्रस्त हुआ, फिर ली चैन की सांस
सूत्रों के मुताबिक जब नारायण जेल पहुंचा, तो वह दो दिनों तक बेचैन रहा। एक तरह से वह वहां के माहौल को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा है। इसलिए जल्द से जल्द उसने रसूखदारों को संदेशा भिजवाया। इसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती किया गया। तब से वह आराम से जेल काट रहा है।
आखिर सख्त कार्रवाई क्यों नहीं कर रही पुलिस
नारायण पर टेनरी कब्जे वाले मामले के अलावा आठ केस दर्ज हैं। पुलिस ने खुद यह तथ्य कोर्ट में रखा था। यह भी दावा किया था कि अगर नारायण बाहर रहा तो वह ऐसी घटनाओं को अंजाम दे सकता है। तब पुलिस अफसरों का कहना था कि वह नारायण व उसके गुर्गों पर गैंगस्टर की कार्रवाई करेंगे, लेकिन अब मामला धीरे धीरे ठंडा पड़ गया है। सूत्रों के मुताबिक सत्ताधारियों की पैरवी की वजह से ऐसा हो रहा है।
कुछ दिन पहले नारायण सिंह को जेल अस्पताल में शिफ्ट किया गया है। उसको लीवर संबंधी कुछ दिक्कत है। - बीडी पांडेय, जेल अधीक्षक