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कानपुरः सैन्य कर्मियों ने पकड़ा संदिग्ध, खुद को बताया पाक सेना का मेजर, मोबाइल पर लिखा 'लिप फोन'

Fri, 15 Jun 2018 09:02 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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कानपुर कैंट क्षेत्र में पकड़ा गया संदिग्ध एहसान खान - फोटो : अमर उजाला
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कानपुरः कैंट के प्रतिबंधित क्षेत्र 14 सिख लाइट इन्फैन्ट्री यूनिट के फैमिली क्वार्टर परिसर में बुधवार सुबह घूम रहे एक संदिग्ध युवक को सैन्य कर्मियों ने पकड़ा है। खुद को पाकिस्तानी सेना का मेजर एहसान जफर खान बता रहे युवक के पास बैग में मिली डॉयरी में कोड वर्ड में काफी कुछ लिखा है। मोबाइल फोन पर लिप फोन लिखा है। 970 रुपये बैग में मिले हैं। उसके पास मिले कागजात में पाकिस्तान की कई महिलाओं के फोटोग्राफ्स व नाम लिखे मिले हैं। आर्मी इंटेलीजेंस, आईबी, एसटीएफ और एटीएस समेत तमाम जांच एजेंसियों के अफसरों ने उससे पूछताछ की। गुरुवार को छावनी पुलिस ने आरोपी युवक को कोर्ट में पेश किया। वहां से न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। 
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आर्मी इंटेलीजेंस के अफसरों से पूछताछ में उसने खुद को लाहौर (पाकिस्तान) के  कैंट, फैसलाबाद निवासी सैय्यद अहमद खान का बेटा एहसान जफर खान बताया। उसने खुद को बीकाम पास और पाकिस्तान आर्मी का मेजर बताया। युवक ने यह भी बताया कि उसने 28 अगस्त 2014 में पाक सेना ज्वाइन की थी। इस वक्त वह खान रेजीमेंट बटालियन-14 में बाघा बार्डर पर तैनात था। वह पहले वाघा बार्डर पर भी पकड़ा जा चुका है। आर्मी इंटेलीजेंस ने लंबी पूछताछ के बाद उसे छावनी पुलिस के हवाले कर दिया। तमाम खुफिया एजेंसियों ने उससे कई राउंड पूछताछ की। उसका मोबाइल फोन और दस्तावेज भी देखे। पुलिस के मुताबिक 14 सिख लाइट इन्फैन्ट्री यूनिट के कैप्टन शंकर डी आरबू की तरफ से आरोपी के खिलाफ प्रतिबंधित क्षेत्र में घुसने व अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई है।

कायमगंज फर्रुखाबाद का रहने वाला है संदिग्ध
सीओ कैंट अजीत कुमार सिंह के मुताबिक छानबीन में पता चला है कि संदिग्ध का नाम असली नाम अरविंद शाक्य है। वह तुर्क ललइया, कायमगंज, फर्रुखाबाद निवासी अमूल स्टोर संचालक गिरीश चंद्र का बेटा है। मां का नाम कृष्णा है। अरविंद की मां और उसके गांव के पूर्व प्रधान मनोज कटियार से बातचीत में पता चला है कि एक साल पहले अरविंद को सेना ने बाघा बार्डर में पकड़ा था। 10 मार्च को फर्रुखाबाद में सिख लाइट इन्फैन्ट्री यूनिट एरिया में प्रवेश करते भी वह धरा गया था। वह गलत बातें-गलत पहचान क्यों बता रहा है, यह जांच का विषय है। पाकिस्तान के बारे में उसे इतनी जानकारी कैसे मिली, क्या लिंक है, यह सब देखा जा रहा है।
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मानसिक रोगी दर्शाने की कोशिश की
पुलिस के मुताबिक पूछताछ के दौरान अरविंद खुद को मानसिक रोगी दर्शाने की कोशिश करता रहा। परिजनों ने भी पुलिस को अरविंद के मानसिक रोगी होने की बात बताई है। सीओ के मुताबिक सैन्य अफसरों ने आरोपी को मनोचिकित्सक को दिखाया। सैन्य अफसरों ने उसे पूरी तरह फिट बताया है। सीओ ने बताया कि उन्होंने जेल अफसरों को अरविंद की मानसिक स्थिति की जांच और इलाज कराए जाने को लिखा है।

सवाल तो ये हैं
अरविंद के परिजन उसे मानसिक रूप से अस्वस्थ बता रहे हैं। अगर ऐसा है तो वह कहीं ऊट-पटांग हरकतें करते क्यों नहीं पकड़ा जाता है। वह जब भी पकड़ा गया, प्रतिबंधित सैन्य क्षेत्र में ही पकड़ा गया। वह बाघा बार्डर पर पकड़ा गया। फिर फर्रुखाबाद व कानपुर में भी सैन्य क्षेत्र में चहलकदमी करते पकड़ा गया। परिजनों को अरविंद की मानसिक स्थिति के बारे में पता है तो उसका उचित इलाज और निगरानी क्यों नहीं रखी जाती है। अरविंद बाघा बार्डर और कानपुर कैसे पहुंचा। उसे आर्थिक मदद कौन देता है। उसे पाकिस्तानी सेना और वहां के लोगों आदि के बारे में इतनी गहन जानकारी कैसे है। ऐसे कई सवाल हैं, जिन पर खुफिया विस्तार से जांच कर रही है। सीओ कैंट के मुताबिक जरूरत हुई तो अरविंद को कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी।
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