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सिर्फ सरकार के प्रयास से कश्मीर की कश्मीरियत नहीं लौटेगी, अभी 370 हटा बाकी सब वैसा ही- सुशील पंडित

Mon, 26 Aug 2019 11:10 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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रूट्स इन कश्मीर के संस्थापक सुशील पंडित - फोटो : Twitter
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कश्मीरी संस्कृति, सभ्यता के जानकार और रूट्स इन कश्मीर के संस्थापक सुशील पंडित का कहना है कि सिर्फ सरकार के प्रयास से कश्मीर से उसकी कश्मीरियत नहीं लौट पाएगी। अभी कश्मीर से सिर्फ 370, 35 ए हटाया गया है, बाकी सब उसी तरह से कब्जे में है।
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इसके लिए जरूरी है कि वहां की सदियों पुरानी विद्वत परंपरा की लोगों को जानकारी हो। वह सीएसजेएमयू परिसर में दीनदयाल शोध संस्थान और संस्कृत भारती के संयुक्त प्रयास से कश्मीर पर आयोजित संगोष्ठी में बोल रहे थे। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस योग को पूरी दुनिया में फैलाने में जुटे हैं।
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वहां की सदियों पुरानी विद्वत परंपरा की लोगों को जानकारी होनी चाहिए

उस योग के जन्मदाता महर्षि पतंजलि कश्मीर से ही थे। इसी तरह विश्व का सबसे प्राचीन इतिहास राजतरंगिनी के लेखक कल्हण भी कश्मीर से थे। प्रसिद्ध नाट्यशास्त्र को भरतमुनि ने कश्मीर की वादियों में ही बैठकर लिखा। साउंड एनर्जी पर लिखा गया सबसे पहला ग्रंथ ध्वन्वालोक जिसे आनंदवर्धन ने लिखा है, वह भी कश्मीर से ही थे।

इसी ध्वन्वालोक पर आजकल कानपुर की आईआईटी के साउंड एनर्जी विभाग में रिसर्च चल रहा है। महाभाष्य लिखने वाले रुइयक भी कश्मीर से संबंध रखते हैं। उन्होंने कहा कि कश्मीर की इतनी समृद्ध विद्वत परंपरा को जानबूझकर खत्म किया गया।

सिर्फ मुस्लिम शासकों का इतिहास ही लोगों को पढ़ाया गया। इसमें बदलाव की आवश्यकता है। बताया कि विद्वान पाणिनी स्वात घाटी में रहते थे। यह वही घाटी है जो इस समय पाक अधिकृत कश्मीर में स्थित है। वर्तमान में यह घाटी आतंकवादियों के गढ़ के रूप में जानी जाती है। 
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