Human Trafficking Case
- फोटो : अमर उजाला
गैंग को 70 हजार रुपये में बेचा
फिर आरोपी ने उसे दिल्ली के एक भिखारी गैंग को 70 हजार रुपये में बेच दिया था। वहां यातनाओं से सुरेश की तबीयत खराब हुई तो गैंग लीडर ने पिछले साल सितंबर में विजय के हाथों कानपुर भेज दिया था। पिछले साल 30 अक्तूबर की शाम वह गंभीर हालत में किदवईनगर चौराहे पर पड़ा मिला।
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मुख्य आरोपी अभी भी फरार
राहगीरों ने सुरेश मांझी को घर पहुंचाया। नौबस्ता पुलिस ने मामले में सुरेश के भाई की तस्कर गैंग के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर सरगना समेत दो को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, जबकि मुख्य आरोपी अभी भी फरार है। बता दें कि मामले में तीन लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई थी। जांच के लिए टीम बनाई गई थी।
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आठ माह से चल रहा था इलाज
परिजनों ने बताया कि नवंबर से दिल्ली से लेकर हैलट और कांशीराम में उसका इलाज चल रहा था। हैलट अस्पताल से 10 जून को छुट्टी हुई थी। डॉक्टरों ने उसकी हालत बेहद नाजुक बताई थी। परिजन सुरेश मांझी को घर ले गए थे, जहां रविवार देर रात हालत बिगड़ने पर उसे हैलट लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
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सरगना और उसकी मां हुई थी गिरफ्तार, विजय फरार
सुरेश मांझी को यातनाएं देकर भीख मंगवाने वाले मानव तस्कर सरगना राज नागर और उसकी मां आशा देवी को नौबस्ता पुलिस ने दबाव पड़ने पर गिरफ्तार कर लिया था। लेकिन आंखें फोड़ने और पंजे तोड़ने वाला आरोपी विजय अभी तक फरार है। पुलिस हर बार रटा रटाया बयान दे देती है। अन्य सदस्यों की तलाश में दबिश दे रही है।