देश की आजादी में अहम भूमिका निभाने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जीवन जितना रहस्यमयी रहा है, उतना ही रहस्य सुभाष चंद्र बोस की एक प्रतिमा का भी है। आजाद भारत में भी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा मालखाने में कैद है।
आज सुभाष चंद्र बोस की जयंती है तो एक बार फिर मालखाने में कैद प्रतिमा चर्चा में आ गई है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की एक मात्र प्रतिमा पुलिस क्लब में लगी है। सन 2000 में शिवसेना के तत्कालीन जिला प्रमुख रामवीर द्विवेदी ने हरदोई में मौनी बाबा मंदिर तिराहे के निकट स्थित नगर पालिका परिषद की भूमि पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा स्थापित किए जाने की कवायद शुरू की थी।
23 जनवरी 2000 को नगर पालिका की भूमि पर फाउंडेशन बनवाकर सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा स्थापित कर दी गई थी। इसीबीच शहर कोतवाली की पुलिस मौके पर पहुंची और प्रतिमा को कब्जे में ले लिया। पूरे घटनाक्रम में शांतिभंग की आशंका में दो लोगों का चालान किया गया। तब से नेता जी की ये प्रतिमा मालखाने में ही कैद है।
दो बार मिली स्थापना की अनुमति
शिवसेना के तत्कालीन जिला प्रमुख रामवीर द्विवेदी ने कहा कि नगर पालिका की भूमि पर नेताजी सुभाषचंद्र बोस की प्रतिमा स्थापित करने के लिए अनुमति मांगी गई थी। तब अनुमति मिली भी थी, लेकिन अचानक पुलिस को शांतिभंग का खतरा महसूस हुआ और फिर प्रतिमा जब्त कर ली गई।
28 दिसंबर 1998 को नगर पालिका के बोर्ड प्रस्ताव संख्या 11 के क्रम में प्रतिमा स्थापना की अनुमति दी गई थी। इसके बाद 20 जनवरी 2003 को भी पुराने प्रस्ताव का हवाला देकर प्रतिमा स्थापित करने की अनुमति दी गई, लेकिन प्रतिमा स्थापित नहीं हो पाई।
अब अंकित गुप्ता ने शुरू की कानूनी लड़ाई
शहर के मोहल्ला खजांचीटोला निवासी युवा अंकित गुप्ता सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा को मालखाने से बाहर लाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। अंकित गुप्ता ने तीन अक्टूबर 2019 को सीजेएम न्यायालय में एक प्रार्थनापत्र देकर प्रतिमा को रिलीज किए जाने की मांग की।
इस पर न्यायालय ने शहर कोतवाली से आख्या तलब की। कोतवाली ने आख्या में बताया कि उक्त प्रतिमा 2000 में हुए विवाद में मालखाने में दाखिल की गई है। इस पर उन्होंने इस क्षेत्राधिकार के बाहर बताया था। अब बुधवार को अंकित गुप्ता ने जिला जज के न्यायालय में प्रार्थनापत्र देकर सीजेएम के आदेश के विरुद्ध रिवीजन प्रस्तुत किया है।