देश की 22 आईआईटी की ग्लोबल ब्रांडिंग और इंटरनेशनल रिलेशनशिप को बढ़ाने के उद्देश्य से ज्वाइंट एडमिशन बोर्ड (जैब) ने एडमिशन का नियम बदल दिया है। अब नौ देशों के स्टूडेंट आईआईटी की संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) एडवांस 2017-18 का ऑनलाइन आवेदन फार्म सीधे भर सकेंगे। इन स्टूडेंटों को जॉइंट एंट्रेंस एग्जाम (जेईई) मेन का पेपर नहीं देना पड़ेगा। ऐसा पहली बार होगा। मेन का आयोजन योग्यता परीक्षा के रूप में होता है। इसमें सफल दो लाख स्टूडेंट ही जेईई एडवांस का आवेदन फॉर्म भर पाते हैं। नए शैक्षिक सत्र से यह व्यवस्था बदल जाएगी।
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इंटरनेशनल रिलेशनशिप को लगा था झटका
जेईई मेंस
जेईई मेन 2015-16 के आवेदन फार्म करीब 24 विदेशी स्टूडेंटों ने भरे थे। इसमें से 6 स्टूडेंट सफल हुए लेकिन सबने एडमिशन नहीं लिया। इससे आईआईटी के ग्लोबल ब्रांडिंग और इंटरनेशनल रिलेशनशिप को झटका लगा। इसी का नतीजा रहा कि पूरा मामला जैब मीटिंग में रखा गया। यह मीटिंग गत सोमवार को आईआईटी गुवाहाटी में हुई थी। चेयरमैन प्रो. कृष्णकांत की अध्यक्षता वाली जैब की मीटिंग के दौरान बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी (बीटेक) और बैचलर ऑफ साइंस (बीएस) में विदेशी स्टूडेेंट बढ़ाने की रणनीति बनाई गई। साथ ही एडमिशन की एक बाधा दूर करने पर मुहर लगा दी गई। जैब के मुताबिक नए सत्र (2017-18) से विदेशी स्टूडेंटों को जेईई मेन का आवेदन फार्म भरने और एंट्रेंस एग्जाम देने की जरूरत नहीं होगी। अभी जेईई मेन क्वालीफाई करने वाले दो लाख स्टूडेंटों को ही जेईई एडवांस का फार्म भरने को मिलता था। अब ऐसा नहीं होगा। नौ देशों के स्टूडेंट जेईई एडवांस का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन सीधे करा सकेंगे। जेईई एडवांस का पेपर देंगे और सफलता हासिल करने के बाद एडमिशन लेंगे। यह मामला सितंबर में प्रस्तावित जैब की मीटिंग में भी रखा जाएगा।