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छात्र संघ चुनाव, फिर भंवर में नाव

Sun, 17 Jan 2016 01:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
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महाविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव कराने की मुख्यमंत्री की घोषणा से कॉलेजों में हलचल शुरू हो गई है। दावेदार छात्र नेताओं ने रणनीति भी बनानी शुरू कर दी है।
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लेकिन, पांच सालों बाद भी मुद्दा वहीं कि वहीं है, वर्तमान छात्रनेता लिंगदोह कमेटी के अनुसार चुनाव नहीं चाह रहे हैं। वहीं, महाविद्यालयों के प्राचार्यों का कहना है कि चुनाव तभी कराए जाएंगे, जब सारी व्यवस्था लिंगदोह कमेटी के अनुसार हो।

कैसे कराना है चुनाव, करेंगे बैठक
छात्र संघ चुनाव कराने की घोषणा पर शनिवार को कानपुर विश्वविद्यालय छात्र संघ ने फजलगंज में बैठक का आयोजन किया। इसमें वरिष्ठ छात्र नेता राघवेंद्र दुबे ने कहा कि चुनाव होने से छात्र संघ सक्रिय होगा।
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बैठक में चुनाव कराने की कार्य योजना पर भी विचार किया गया। तय हुआ छात्र नेता कॉलेज प्रशासन के साथ बैठक कर निर्णय लेंगे कि चुनाव किस तरह कराया जाए। बैठक में शिवबीर सिंह, अनिरुद्ध शुक्ल, अमित पांडेय, सचिव बाजपेयी, शिवा मिश्र, मनीष शुक्ल, अनुराग दक्षित और फैज अहमद आदि मौजूद रहे।

लिंगदोह सिफारिशों के इन बिंदुओं पर है आपत्ति
स्नातक स्तर के चुनाव में खड़े प्रत्याशियों की उम्र 17 से 22 साल होनी चाहिए। परास्नातक स्तर पर अधिकतम 25 और शोध स्तर पर 28 साल उम्र अनिवार्य।

आपराधिक रिकार्ड रखने वाला कोई भी छात्र चुनाव में नहीं खड़ा हो सकता।
चुनाव में खड़े छात्र की कक्षा में 75 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य।

चुनाव में खड़ा प्रत्याशी पांच हजार रुपये से अधिक धनराशि चुनाव में खर्च नहीं कर सकता। d सभी प्रत्याशियों को चुनाव खर्च का पूरा ब्योरा पेश करना होगा।

चुनाव में खड़ा प्रत्याशी अपने प्रचार के लिए बैनर, पोस्टर का उपयोग नहीं करेगा। सिर्फ हाथ से लिखे पोस्टर मान्य होंगे। प्रचार के लिए किसी तरह का लाउडस्पीकर, वाहन, परिवहन या अन्य साधनों का उपयोग भी नहीं करेंगे।
चुनाव में डिपार्टमेंट वार प्रत्याशी चुनाव लड़ेंगे।

लिंगदोह कमेटी
2006 में छात्रसंघ चुनाव में सुधार के लिए मिनिस्ट्री आफ ह्यूमन रिर्सोस डेवलपमेंट ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार लिंगदोह कमेटी गठित की थी।

यह कमेटी पूर्व चीफ इलेक्शन कमिश्नर जेएम लिंगदोह के नेतृत्व में गठित हुई थी, इसलिए इसे लिंगदोह के नाम से जाना गया। इस कमेटी ने 26 मई 2006 को सुधार के लिए अपनी सिफारिशी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपी। 22 सितंबर 2006 से इस पर अमल करने का फरमान जारी हुआ।

इसलिए बंद हुए थे चुनाव
चुनाव में खड़े प्रत्याशी लिंगदोह की सिफारिशों के विरोध में खड़े थे। वे पूर्व में होते आ रहे चुनाव की तरह की चुनाव कराने के पक्ष में थे। पर, इन चुनावों में चूंकि हर दूसरे दिन प्रत्याशियों व समर्थकों में मारपीट, कॉलेज में तोड़फोड़, मैनेजमेंट व कॉलेज पर दबाव और आम स्टूडेंटों को परेशानी होती थी।

महीनों पढ़ाई बाधित रहती थी इसलिए कॉलेजों ने साफ कह दिया कि लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के बिना चुनाव नहीं कराए जाएंगे। स्टूडेंटों के विरोध पर कॉलेज कोर्ट चले गए और स्टे ले आए कि सिफारिशों के बिना चुनाव नहीं कराएंगे।
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