कानपुर। जाड़े में शरीर को मौसम के अनुकूल ढालने के लिए रिस रहा तनाव हार्मोन कार्टिसोल ब्लड शुगर लेवल हाई कर दे रहा है। इससे उन लोगों को अधिक दिक्कत हो रही है जो पहले से हाई ब्लड शुगर के रोगी हैं। उनकी ब्लड शुगर बेकाबू हो रही है। ऐसे में मीठी, तली-भुनी चीजों, जंक फूड का सेवन छोड़कर फाइबर से भरपूर चीजें खाएं तो कार्टिसोल के दुष्प्रभाव से बचा जा सकता है। डायबिटीज के युवा और अधेड़ रोगी इंटरमिटेंट फास्टिंग करें।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग में डायबिटीज के रोगियों पर चल रहे शोध का पहला चरण पूरा होने पर यह नतीजे सामने आए हैं। इस शोध में चार सौ रोगी शामिल किए गए हैं। इन पर इंटरमिटेंट फास्टिंग तरीका भी अपनाया गया है। इसमें 40 से 50 साल आयु वर्ग के रोगियों के दो खाने के बीच का गैप बढ़ा देते हैं। 60 साल से अधिक आयु वर्ग वालों में इसे नहीं अपनाया जाता। वृद्ध रोगियों में ब्लड शुगर अचानक बहुत नीचे गिरने का डर रहता है इस स्थिति को हाइपोग्लाइसीमिया कहते हैं।
शोध के अगुवा मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. विशाल कुमार गुप्ता ने बताया कि जाड़े में एडरीनलीन ग्रंथि से कार्टिसोल हार्मोन का रिसाव अधिक होता है। कार्टिसोल लिवर और मांसपेशियों में जमा ग्लाइकोजन को तोड़ देता है। इससे शरीर में ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है। ग्लाइकोजन शरीर में संग्रहित ग्लूकोज को कहते हैं। पहले से ब्लड शुगर रोगियों के लिए शुगर लेवल बढ़ना अधिक खतरनाक होता है। उन्होंने बताया कि कैफीन, मिठाई, प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन करने से भी कार्टिसोल बढ़ता है।
फाइबरयुक्त खाद्य पदार्थ लें
डॉ. विशाल कुमार गुप्ता ने बताया कि डायबिटीज रोगी कार्टिसोल के दुष्प्रभाव से बचने के लिए वसा युक्त खाद्य पदार्थ न लें। जंक फूड, मीठी चीजों का सेवन कतई न करें। सुबह टहलने जाने पर ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। इससे शाम को टहलने जाएं। इससे बीपी और डायबिटीज दोनों नियंत्रित रहेगी।