घटना की सूचना मिलते ही आसपास के लोग एकत्र हो गए और कड़ी मशक्कत के बाद हाइड्रा मशीन बुलाकर गोवंश को सुरक्षित बाहर निकलवाया। इसके बाद उसे तत्काल इलाज के लिए पशु चिकित्सालय भिजवाया गया।
सड़कों और खेतों में बेसहारा गोवंश का जमावड़ा
इस हादसे ने एक बार फिर कस्बे और ग्रामीण इलाकों में खुलेआम घूम रहे बेसहारा गोवंश की गंभीर समस्या को उजागर कर दिया है। दिन के समय यह गोवंश किसानों के खेतों में घुसकर फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं, जबकि रात में मुख्य सड़कों पर जमावड़ा लगाने से राहगीरों और वाहन चालकों के लिए लगातार जानलेवा हादसे की आशंका बनी रहती है।
अफसरों के दावों पर उठे सवाल
गौरतलब है कि हाल ही में पशुपालन विभाग ने पंचायत प्रशासकों और सचिवों को 03 दिन के भीतर सभी बेसहारा गोवंशों को संरक्षित करने के सख्त निर्देश दिए थे। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अंकुर सचान ने 90 प्रतिशत गोवंशों को संरक्षित करने का दावा किया है, लेकिन धरातल पर हालात अब भी जस के तस बने हुए हैं।
वहीं नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी दिनेश चंद्र आर्य ने बताया कि कस्बे में अब तक 360 गोवंशों को संरक्षित किया जा चुका है और अगले 02 दिनों के भीतर शेष गोवंशों को भी गोशालाओं में भिजवा दिया जाएगा।