कानपुर। छात्रा जो कक्षा में बाकी बच्चों के साथ पढ़ती, खेलती और खाती है लेकिन जब अन्य बच्चों को पता चलता है कि वह दलित है तो बाकी बच्चे उससे किनारा कर लेते हैं। उसकी पीड़ा जब बच्चों को दिखी तो उन्होंने इस कुरीति को खत्म कर उसे साथ जोड़ लिया। यह कहानी समाज को आईना दिखाने वाली है। ऐसी ही कई कहानियां कहानी दर कहानी में हैं जिसका विमोचन रविवार को डॉ. सुजाता वर्मा स्मृति समिति की ओर से आयोजित राष्ट्रीय हिंदी कथा लेखन पुस्तक विमोचन, प्रतिभा सम्मान व काव्य गोष्ठी में किया गया।
खलासी लाइन स्थित शास्त्री भवन में मुख्य अतिथि कवि डॉ. उर्वशी अग्रवाल, शुभ्रो सेन, जीपी वर्मा, डॉ. सुरेश अवस्थी, कमल मुसद्दी ने दीप जलाकर कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके बाद 16 युवा कहानीकारों की कहानी संग्रह कहानी दर कहानी पुस्तक का विमोचन किया गया। पुस्तक में समाज को संदेश देने वाली कई कहानियां शामिल हैं। इनके लेखक फौजिया इकबाल, मैत्रीय बैनर्जी, पूजा पाराशर, शालिनी तिवारी, विभा पाठक, मोहिनी तिवारी, अंकिता श्रीवास्तव, निहारिका कुंवर, मृदुला श्रीवास्तव, आर्यवश महाजन, आयशा जमाल आदि को सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि ने कहा कि हिन्दी भाषा मानव मन की भावनाओं और अनुभूतियों को व्यक्त करने में बहुत सशक्त हैं। यही कारण है की हिन्दी साहित्य बहुत समृद्ध है।
इसके बाद व्यंग्यकार श्रवण शुक्ला, हास्य कवि दिलीप दुबे, कवयित्री अंकिता शुक्ला, डॉ. शोभा सिंह, वीणा उदय, वरिष्ठ गीतकार लोकेश शुक्ला ने कव्य पाठ किया। लोकेश शुक्ल को उनकी रचनाधर्मिता के लिए सम्मानित किया गया। संचालन डॉ. वीणा उदय व प्रिया वर्मा ने किया। समिति की डॉ. प्रीति पांडेय ने स्वागत और धन्यवाद ज्ञापन दिया। यहां पर अध्यक्ष सरन पी वर्मा, कुसुम यादव, केके बाजपेई, पंकज बाजपेई, समरेश सचदेवा, रेवा सचदेवा, कीर्ति रमन सचदेवा आदि रहे।