गैस्ट्रोइंटोलॉजी के विभागाध्यक्ष डॉ. विनय कुमार ने बताया कि 60 रोगियों को ओपीडी से चिन्हित किया गया था। इनकी जांचें कराई गईं। इनका लिवर फैटी पाया गया। अब इन पर विस्तृत अध्ययन किया जाएगा।
अभी तक यह माना जाता रहा है कि अधिक मोटापा और शराब पीने की वजह से लिवर फैटी हो जाता है। लेकिन अब ऐसे भी रोगी आ रहे हैं जो दुबले-पतले हैं और शराब भी नहीं पीते, फिर भी लिवर फैटी हो गया है। इन रोगियों को लीन नैस (नॉन एल्कोहलिक स्टीटोहेपेटाइटिस) श्रेणी में रखा गया है। इन रोगियों की विभिन्न जांचें कराई गईं लेकिन अभी फैटी लिवर का कोई सटीक कारण नहीं मिल रहा है।
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यह आकलन किया जा रहा है कि पेस्टीसाइड्स के इस्तेमाल, वायरल संक्रमण के दुष्प्रभाव से भी ऐसा होता है। इन रोगियों की स्थिति के विस्तृत अध्ययन की योजना बनाई जा रही है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के गैस्ट्रोइंटोलॉजी विभाग ने लीन नैस के रोगियों पर अध्ययन किया है। रोगियों को हैलट ओपीडी और मल्टी सुपर स्पेशियलटी हॉस्पिटल की लिवर क्लीनिक से चिन्हित किया गया। गैस्ट्रोइंटोलॉजी के विभागाध्यक्ष डॉ. विनय कुमार ने बताया कि 60 रोगियों को ओपीडी से चिन्हित किया गया था। इनकी जांचें कराई गईं। इनका लिवर फैटी पाया गया। अब इन पर विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। इससे पता चलेगा कि शरीर का वजन सामान्य से कम होने के बाद भी लिवर फैटी क्यों है? लीन नैस के रोगियों के अध्ययन को अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित किया जाएगा।